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उत्तर भारत में मौसम में बदलाव: बारिश और बर्फबारी की संभावना

उत्तर भारत में मौसम में बदलाव की संभावना है, जहां पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी हो सकती है। मैदानी इलाकों में भी गर्मी में कमी आएगी, हालांकि बारिश की संभावना कम है। जानें मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों का पूर्वानुमान और जेट स्ट्रीम का प्रभाव।
 

मौसम में बदलाव की तैयारी


पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बारिश और बर्फबारी की संभावना


नई दिल्ली: उत्तर भारत के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में आज से तापमान में कमी आने की उम्मीद है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिसके कारण पूरे उत्तर भारत में मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी की संभावना है, जबकि मैदानी इलाकों में गर्मी में थोड़ी कमी आएगी। हालांकि, मैदानी क्षेत्रों में बारिश की संभावना कम है.


मौसम का पूर्वानुमान

इस पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज-चमक, वज्रपात और हल्की बारिश हो सकती है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में इसका सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिलेगा.


मौसम विभाग के अनुसार, 14 और 15 मार्च को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है। इसके बाद, 15 से 18 मार्च के बीच इन राज्यों में बारिश और बर्फबारी की गतिविधियों में वृद्धि होने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं, और हवा की गति 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है.


पंजाब और हरियाणा में मौसम

मौसम विभाग के अनुसार, 14 से 17 मार्च के बीच पंजाब के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना है। 15 से 17 मार्च के दौरान हरियाणा और चंडीगढ़ में भी इसी तरह का मौसम रहने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में 15 और 16 मार्च को आंधी और बारिश के आसार हैं। राजस्थान के कुछ हिस्सों में 14 और 15 मार्च को गरज के साथ बारिश और वज्रपात हो सकता है.


जेट स्ट्रीम का प्रभाव

उत्तर-पश्चिम के ऊपर उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम भी सक्रिय है। यह लगभग 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर बह रही है और इसकी हवा की गति लगभग 160 किलोमीटर प्रति घंटे है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जेट स्ट्रीम पश्चिमी विक्षोभ को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब इसकी गति तेज होती है, तो पश्चिमी विक्षोभ भी अधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे बारिश और बर्फबारी की संभावना बढ़ जाती है.