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एटीएम पिन का आविष्कार: एक अद्भुत कहानी

क्या आपने कभी सोचा है कि एटीएम पिन का आविष्कार किसने किया? जानें जेम्स गुडफेलो की कहानी, जिन्होंने इस तकनीक को विकसित किया और इसके लिए उन्हें केवल 10 पाउंड का इनाम मिला। यह कहानी न केवल तकनीकी विकास की है, बल्कि यह हमें यह भी बताती है कि कैसे एक साधारण पिन ने अरबों की बैंकिंग इंडस्ट्री को सुरक्षित किया।
 

नई दिल्ली में एटीएम पिन की कहानी

नई दिल्ली: जब भी हम एटीएम से पैसे निकालते हैं, तो हमें चार अंकों का एक गुप्त पिन डालना होता है। इस पिन के बिना न तो हम पैसे निकाल सकते हैं और न ही कोई अन्य व्यक्ति हमारे खाते में घुसपैठ कर सकता है। यह पिन हमारी मेहनत की कमाई की सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस पिन का आविष्कार किसने किया और इसके लिए उस व्यक्ति को कितनी राशि मिली? इस कहानी में कई रोचक तथ्य छिपे हैं।


स्कॉटलैंड के इंजीनियर का योगदान


जेम्स गुडफेलो, एक स्कॉटिश इंजीनियर, ने 1966 में इस पिन सुरक्षा प्रणाली का आविष्कार किया। उस समय, वह ब्रिटेन की एक इंजीनियरिंग कंपनी में कार्यरत थे, जो बैंकों के लिए एटीएम बनाने के एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी। इसी दौरान, जेम्स ने एक सुरक्षित तकनीक विकसित की, जो कार्ड और एक विशेष पिन के माध्यम से यह सुनिश्चित कर सकती थी कि पैसे निकालने वाला व्यक्ति सही ग्राहक है या नहीं।


सुरक्षा का अरबों का उद्योग, लेकिन इनाम मात्र 10 पाउंड


जेम्स गुडफेलो द्वारा विकसित इस आधुनिक सुरक्षा प्रणाली ने बैंकिंग क्षेत्र में एक नई क्रांति ला दी। हालांकि, इस महत्वपूर्ण आविष्कार के लिए उन्हें केवल 10 पाउंड का बोनस मिला। यह सुनकर आश्चर्य होता है कि जिस तकनीक ने अरबों की बैंकिंग इंडस्ट्री को सुरक्षा प्रदान की, उसके आविष्कारक को इतनी कम राशि दी गई।


कैश मशीन का सफर लंदन से शुरू हुआ


जेम्स गुडफेलो की तकनीक के एक साल बाद, 1967 में लंदन में दुनिया की पहली कैश मशीन स्थापित की गई। इसके बाद, इस तकनीक की उपयोगिता और सुरक्षा को देखते हुए इसका विस्तार तेजी से हुआ। 4 जून 1973 को अमेरिका में एटीएम सिस्टम से संबंधित एक महत्वपूर्ण पेटेंट जारी किया गया, और आज यही पिन सुरक्षा प्रणाली दुनिया भर की एटीएम मशीनों का आधार बन चुकी है।