एनपीएस से इमरजेंसी निकासी: जानें कैसे और कब करें
एनपीएस की जानकारी
नई दिल्ली: नेशनल पेंशन सिस्टम, जिसे आमतौर पर एनपीएस के नाम से जाना जाता है, एक दीर्घकालिक रिटायरमेंट बचत योजना है। इसे भारत सरकार ने नागरिकों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से शुरू किया था। इस योजना के तहत नियमित योगदान के माध्यम से रिटायरमेंट के समय एक बड़ा कोष तैयार किया जाता है। हालांकि, कई लोग इसे केवल बुढ़ापे की बचत योजना मानते हैं, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में इसमें से आंशिक निकासी की सुविधा भी उपलब्ध है।
आंशिक निकासी की शर्तें
एनपीएस से आंशिक निकासी तभी संभव है जब खाताधारक ने कम से कम तीन वर्षों तक नियमित योगदान किया हो। यदि खाता तीन साल से कम पुराना है, तो आपात स्थिति में भी धन निकासी नहीं की जा सकती। तीन साल की अवधि पूरी होने के बाद ही कुछ विशेष परिस्थितियों में निकासी की अनुमति दी जाती है।
पैसा निकालने की विशेष परिस्थितियाँ
सरकार ने कुछ विशेष स्थितियों को परिभाषित किया है जिनमें एनपीएस खाते से धन निकाला जा सकता है। इनमें गंभीर बीमारी का इलाज, बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी, या पहला घर खरीदने जैसी स्थितियाँ शामिल हैं। इन सभी मामलों में उचित दस्तावेज प्रस्तुत करना आवश्यक है।
इमरजेंसी में निकासी की सीमा
एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि कितनी राशि निकाली जा सकती है। नियमों के अनुसार, खाताधारक अपने कुल योगदान का अधिकतम 25 प्रतिशत निकाल सकता है। ध्यान दें कि इसमें नियोक्ता द्वारा किया गया योगदान शामिल नहीं होता। केवल आपकी स्वयं की जमा की गई राशि का 25 प्रतिशत निकाला जा सकता है। यह निकासी पूरी तरह से टैक्स फ्री होती है और सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।
निकासी की संख्या
एनपीएस खाताधारक अधिकतम तीन बार ही इमरजेंसी निकासी कर सकते हैं। हर बार वही सीमा लागू होगी, यानी अपने योगदान का अधिकतम 25 प्रतिशत। इसका मतलब है कि यह सुविधा सीमित है और इसका उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए। बार-बार निकासी करने से रिटायरमेंट के समय मिलने वाली कुल राशि पर प्रभाव पड़ सकता है।
आवेदन प्रक्रिया
यदि आपको इमरजेंसी में धन निकालने की आवश्यकता है, तो सबसे पहले संबंधित पीओपी या नोडल कार्यालय में आवेदन करना होगा। ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है, जहां आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। आवेदन के साथ खर्च का प्रमाण देना आवश्यक है, जैसे कि मेडिकल बिल, अस्पताल के दस्तावेज, कॉलेज एडमिशन लेटर या घर खरीदने का समझौता पत्र। दस्तावेज सही पाए जाने पर राशि सीधे बैंक खाते में भेज दी जाती है।