एलपीजी सिलेंडर बुकिंग में बदलाव: उपभोक्ताओं को अब अधिक इंतजार करना होगा
नई दिल्ली में एलपीजी बुकिंग में बदलाव
नई दिल्ली: देशभर में एलपीजी उपभोक्ताओं को अब सिलेंडर बुक करने में अधिक समय लगेगा। गैस कंपनियों ने हाल ही में नियमों में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं, जिसका उद्देश्य घरेलू गैस की कालाबाजारी को रोकना और सप्लाई व्यवस्था को सुधारना है। मंगलवार को डिस्ट्रीब्यूटर्स ने इस बारे में जानकारी दी।
विशेष रूप से शहरी परिवारों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा, जिनके पास दो सिलेंडर का कनेक्शन है। अब अगली रिफिल के लिए पहले से अधिक समय लगेगा। सरकार का मानना है कि इससे अनावश्यक जल्दी बुकिंग पर रोक लगेगी और जरूरतमंदों को गैस आसानी से मिलेगी।
नए नियमों की आवश्यकता
ईरान युद्ध के बाद एलपीजी सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। इस महीने की शुरुआत में शहरी क्षेत्रों में गैप को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन किया गया था। अब डबल कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के लिए इसे बढ़ाकर 35 दिन कर दिया गया है। इससे कालाबाजारी में कमी आएगी और वितरण अधिक निष्पक्ष होगा। रेलवे और अन्य आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।
नई समय सीमा की जानकारी
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अगली बुकिंग के लिए 45 दिन का इंतजार करना होगा। सामान्य सिंगल बॉटल कनेक्शन वालों के लिए गैप 25 दिन रहेगा, जबकि डबल बॉटल कनेक्शन (DBC) वालों को 35 दिन का समय दिया जाएगा। यह गणना पिछली डिलीवरी की तारीख से की जाएगी, न कि बुकिंग की तारीख से।
छोटे सिलेंडरों के लिए भी नए नियम
14.2 किलो के नियमित सिलेंडर के अलावा, 5 किलो के सिलेंडर के लिए बुकिंग गैप 9 से 16 दिन और 10 किलो के सिलेंडर के लिए 18 से 32 दिन निर्धारित किया गया है। यदि कोई उपभोक्ता निर्धारित समय से पहले बुकिंग करने का प्रयास करेगा, तो सिस्टम उसे ब्लॉक कर देगा। इससे अनुचित बुकिंग पर रोक लगेगी।
उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि बुकिंग की पात्रता पिछली डिलीवरी की तारीख से निर्धारित होगी। समय सीमा पूरी होने से पहले प्रयास करने पर बुकिंग स्वीकार नहीं की जाएगी। किसी भी समस्या या अधिक जानकारी के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-2333-555 पर संपर्क करें।
कमर्शियल गैस की कमी
घरेलू एलपीजी के अलावा, 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडरों की कमी भी बढ़ गई है। सरकार ने राज्यों को 20 प्रतिशत अतिरिक्त आवंटन की अनुमति दी है, जिससे कुल आवंटन 50 प्रतिशत हो गया है। हालांकि, जमीनी स्तर पर राहत में अभी 2-3 दिन लग सकते हैं। छोटे ढाबे और भोजनालयों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, और कुछ परिवारों ने मजबूरी में लकड़ी का सहारा लिया है।