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ओमान में भारतीय जहाज़ पर हमला: तीसरी घटना, सरकार ने स्थिति पर नजर रखी

ओमान के शिनास पोर्ट पर भारतीय क्रू वाले जहाज़ MT जलवीर पर हमले की घटना सामने आई है। यह हाल के दिनों में तीसरी ऐसी घटना है, जिसमें भारतीय नाविकों की जान को खतरा हुआ है। सरकार ने स्थिति पर नजर रखने का आश्वासन दिया है और अमेरिकी अधिकारियों से भी बातचीत की है। जानें इस घटना के बारे में और क्या कदम उठाए गए हैं।
 

ओमान में भारतीय जहाज़ पर हमला

गुरुवार की सुबह, ओमान के शिनास पोर्ट के निकट एक भारतीय क्रू वाले कमर्शियल जहाज़ को निशाना बनाया गया। यह घटना अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुई है, और हाल के दिनों में ऐसी तीसरी घटना है। इस जहाज़ की पहचान MT जलवीर के रूप में हुई है, जो गिनी का झंडा लिए हुए है। शिप मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म 'मरीनट्रैफिक' के अनुसार, MT जलवीर पर 20 भारतीय क्रू मेंबर मौजूद थे, और यह 119.95 मीटर लंबा तथा 16.84 मीटर चौड़ा "एस्फाल्ट/बिटुमेन" टैंकर है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें जहाज़ से धुआं निकलता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि, इस वीडियो की सच्चाई की पुष्टि अभी तक नहीं की गई है। इस बीच, ओमान में भारतीय दूतावास ने कहा है कि वह इस घटना से अवगत है और स्थिति पर नजर रख रहा है।


दूतावास की प्रतिक्रिया

दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में जानकारी दी कि उन्हें ओमान के शिनास पोर्ट के पास एक जहाज़ से संबंधित घटना के बारे में जानकारी मिली है। वे स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहे हैं।


तीसरी घटना का विवरण

यह हाल के दिनों में हुई तीसरी घटना है। पहली घटना 8 जून को हुई थी, जब MT मैरिवेक्स में संभावित हमले के कारण आग लग गई थी। इस टैंकर पर 24 भारतीय क्रू मेंबर थे, जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया। दूसरी घटना 10 जून को हुई, जब ओमान की खाड़ी में पलाऊ के झंडे वाले टैंकर MT सेटेबेलो पर हमला हुआ। इस जहाज पर 24 क्रू मेंबर थे, जिनमें से 21 को बचा लिया गया, लेकिन हमले में तीन लोगों की मौत हो गई। केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि हो गई है, क्योंकि दो शव बरामद कर लिए गए हैं।


सरकार की प्रतिक्रिया

उन्होंने कहा कि सरकार मृतकों के परिवारों के साथ खड़ी है। भारत ने इस हमले को लेकर अमेरिकी चार्ज डी'अफेयर्स जेसन मीक्स को भी तलब किया और कहा कि कमर्शियल शिपिंग और आम लोगों के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। समुद्र में आवाजाही स्वतंत्र रहनी चाहिए, भले ही मध्य पूर्व में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।