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कटिहार में ग्रामीणों को नदी पार कर शव ले जाने की मजबूरी, वीडियो वायरल

कटिहार के मोरसंडा गांव में एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद, उसके परिजनों को शव का अंतिम संस्कार करने के लिए नदी पार करनी पड़ी। पुल की अनुपस्थिति ने ग्रामीणों को मजबूर किया कि वे अर्थी को कंधों पर उठाकर उफनती नदी को पार करें। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। विधायक ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने का आश्वासन दिया है। जानें इस घटना के पीछे की पूरी कहानी।
 

कटिहार में विकास की पोल खोलती घटना

कटिहार: बिहार में विकास और सुशासन के दावों की सच्चाई एक शर्मनाक घटना से उजागर हुई है। फलका प्रखंड के मोरसंडा गांव में एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद, उसके परिजनों और ग्रामीणों को शव का अंतिम संस्कार करने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ी। गांव में पुल की अनुपस्थिति के कारण, ग्रामीणों को मृतक की अर्थी को अपने कंधों पर उठाकर उफनती नदी को पार करना पड़ा। इस भयावह दृश्य का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है, जिसने सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।


अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट तक पहुंचने में कठिनाई

जानकारी के अनुसार, मोरसंडा गांव के अरविंद मंडल की बीमारी के कारण मृत्यु हो गई थी। हिंदू परंपरा के अनुसार, शव को श्मशान घाट ले जाना आवश्यक था। लेकिन समस्या यह थी कि गांव और श्मशान घाट के बीच 'कमला नदी' बहती है, जिस पर कोई पुल नहीं है। अंततः ग्रामीणों ने हिम्मत जुटाई और अर्थी को कंधों पर उठाकर नदी में उतर गए। सावधानी से पानी के बीच से गुजरते हुए, उन्होंने शव को नदी के दूसरी ओर पहुंचाया, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया गया।


बुनियादी सुविधाओं की कमी पर ग्रामीणों का गुस्सा

स्थानीय लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि देश को आजाद हुए कई दशक हो गए, लेकिन इस गांव के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। नदी के दोनों किनारों पर बड़ी आबादी बसती है, जिन्हें हर काम के लिए नदी पार करनी पड़ती है।


चचरी पुल: एकमात्र सहारा

ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में केवल एक निजी नाव चलती है, लेकिन उसमें अधिक लोगों को बैठाया जाता है, जिससे कई बार हादसे होते-होते बचे हैं। इसी कारण लोग नाव पर बैठने से डरते हैं। बाढ़ के समय, जब स्थिति गंभीर हो जाती है, तो ग्रामीण अपनी जेब से पैसे मिलाकर बांस का 'चचरी पुल' बनाते हैं और किसी तरह आवाजाही करते हैं।


राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस अमानवीय स्थिति पर राजनीति भी गरमा गई है। क्षेत्र की विधायक कविता पासवान ने कहा कि उन्होंने इस पुल के निर्माण का मुद्दा पहले भी विधानसभा में उठाया है। उन्होंने प्रशासनिक लाचारी का हवाला देते हुए बताया कि कुछ तकनीकी कारणों से पुल का निर्माण रुका हुआ था। हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद विधायक ने आश्वासन दिया है कि अब इस पुल को प्राथमिकता दी जाएगी और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।