कांग्रेस की रामलीला मैदान रैली: नेताओं पर बढ़ता दबाव
कांग्रेस पार्टी की रैली की तैयारी
कांग्रेस पार्टी के नेता रामलीला मैदान में होने वाली रैली को लेकर काफी दबाव में हैं, विशेषकर राजस्थान के नेताओं पर, जहां स्थानीय निकाय चुनाव चल रहे हैं। राज्य में तीसरे चरण का चुनाव जारी है, और इसी बीच दिल्ली में रैली का आयोजन होना है। कई नेताओं ने कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को इस स्थिति के बारे में समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई सुनवाई नहीं की। नेताओं पर एक ओर क्षेत्र में जाकर मतदान की तैयारी करने का दबाव है, वहीं दूसरी ओर उन्हें दिल्ली में भीड़ जुटाने का भी प्रयास करना है। यदि भीड़ नहीं भी आती है, तो उन्हें अपनी उपस्थिति दिखानी होगी। ध्यान देने योग्य बात यह है कि राज्य में दो दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण नेताओं के परिजन स्थानीय निकाय चुनाव में भाग ले रहे हैं, जिससे उन पर और अधिक दबाव है।
हरियाणा के नेताओं की चुनौती
हरियाणा के नेताओं पर अलग तरह का दबाव है। उन्हें रैली में सबसे अधिक लोगों को लाने की जिम्मेदारी दी गई है। दरअसल, कांग्रेस की रामलीला मैदान की रैली हर बार हरियाणा के कारण ही सफल होती है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने दम पर बड़ी संख्या में लोगों को रैली में लाते हैं। इस बार उनके नेतृत्व को बचाने की चुनौती है, खासकर 2024 की हार के बाद उन्हें किनारे करने की कोशिशें हुई थीं। जाट राजनीति में रणदीप सुरजेवाला उनकी चुनौती बनकर उभरे हैं, जबकि बीरेंद्र सिंह और उनके बेटे ब्रजेंद्र सिंह भी कांग्रेस में लौट आए हैं। इसलिए, हुड्डा पर न केवल अधिक लोगों को लाने का दबाव है, बल्कि यह भी दिखाना है कि उनके समर्थक सबसे अधिक हैं।
उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की स्थिति
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को ज्यादा चुनौती का सामना नहीं करना पड़ रहा है। चुनाव से पहले टिकट के दावेदार खुद ही लोगों को जुटा रहे हैं। इमरान मसूद इस मामले में सबसे अधिक सक्रिय हैं, क्योंकि उन्हें प्रदेश का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। हाल ही में, वे जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली के लिए चल रही भूख हड़ताल में भी शामिल हुए थे। इस प्रकार, वे रैली के लिए दिल्ली और पश्चिमी यूपी दोनों जगहों से लोगों को जुटा रहे हैं। पंजाब और उत्तराखंड में भी चुनाव हैं, इसलिए वहां के नेताओं को भी ज्यादा समस्या नहीं है। टिकट के दावेदार दोनों राज्यों से अच्छी संख्या में लोगों को दिल्ली लाएंगे। इस प्रकार, कांग्रेस को उम्मीद है कि रैली की सफलता अनुमान से अधिक होगी।