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कांग्रेस नेताओं का आरोप: यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की तैयारी

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने यूपीआई लेनदेन पर संभावित शुल्क लगाने को लेकर मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है, जबकि वित्त मंत्री ने पहले कोई शुल्क नहीं लगाने का आश्वासन दिया था। खरगे ने महंगाई के मुद्दे पर भी चिंता जताई और कहा कि यह कदम आम जनता की बचत को प्रभावित करेगा। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का आरोप


कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के संसद में दिए गए आश्वासन के बावजूद, यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की संभावनाओं पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है।


खरगे ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 'नो फीस ऑन यूपीआई' की नीति को बदलकर अब 'दो हजार रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर नो फीस' कर दिया गया है। उन्होंने महंगाई के मुद्दे पर भी चिंता जताई और कहा कि थोक महंगाई लगभग 10 प्रतिशत के करीब है।


कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार डिजिटल भुगतान पर टैक्स लगाकर आम जनता की बचत को खत्म करने की योजना बना रही है।


उन्होंने बताया कि कई रिपोर्टों के अनुसार, पांच हजार रुपये के लेनदेन पर 25 रुपये और 10 हजार रुपये पर 50 रुपये तक की वसूली की जा सकती है। उन्होंने सरकार से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा है।


राहुल गांधी ने कहा कि अब दो हजार रुपये से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लागू किया जा सकता है। हालांकि, इन लेनदेन की संख्या केवल पांच प्रतिशत है, लेकिन यूपीआई के कुल लेनदेन मूल्य का लगभग 65 प्रतिशत इन्हीं में है।


उन्होंने कहा, "सरकार का कहना है कि ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फीस अंततः ग्राहक की जेब से ही आएगी। अमेरिकी भुगतान कंपनियां भारत की शून्य-एमडीआर नीति का लंबे समय से विरोध कर रही हैं, और अब मोदी सरकार ने इस दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।"