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केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर विंडफॉल टैक्स में की कटौती

केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स में कटौती की है, जो एक जून से प्रभावी होगी। नई दरों के अनुसार, पेट्रोल पर टैक्स 1.5 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 13.5 रुपये और एटीएफ पर 9.5 रुपये प्रति लीटर होगा। यह निर्णय वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के मद्देनजर लिया गया है, ताकि निर्यातक अनुचित लाभ न उठा सकें। जानें इस फैसले के पीछे की वजह और इसके प्रभाव।
 

नई दरें एक जून से लागू

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, जिसे विंडफॉल टैक्स कहा जाता है, में कमी की है। यह नई दरें एक जून से प्रभावी होंगी। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर यह टैक्स आधा कर 1.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, डीजल पर यह 13.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 9.5 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।

अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर सड़क एवं अवसंरचना उपकर (Road and Infrastructure Cess) को शून्य रखा जाएगा। घरेलू उपयोग के लिए निकाले जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।


पिछले महीने में बढ़ा था टैक्स

पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) को 16 मई को 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया गया था। अब इसे 1 जून से घटाकर 1.5 रुपये प्रति लीटर किया गया है। डीजल पर यह शुल्क 16.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 13.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसी तरह एटीएफ पर शुल्क 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 9.5 रुपये प्रति लीटर किया गया है।

सरकार ने 26 मार्च को डीजल के निर्यात पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगाया था। 11 अप्रैल को इन दरों को बढ़ाकर क्रमशः 55.5 रुपये और 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था।


सरकार का उद्देश्य

इस टैक्स का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण निर्यातक मूल्य अंतर का अनुचित लाभ न उठा सकें। 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे, जिसके बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की।

युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल थी, जबकि पिछले एक सप्ताह से यह 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के चलते पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने और निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए यह विंडफॉल टैक्स लगाया गया था।