कोटा में रेलवे अंडरपास निर्माण के दौरान हादसा, दो इंजीनियरों की मौत
कोटा में दर्दनाक हादसा
कोटा: गुरुवार की रात को राजस्थान के कोटा-झालावाड़ नेशनल हाईवे 52 पर दारा घाटी के निकट एक रेलवे अंडरपास के निर्माण के दौरान एक गंभीर घटना घटी। इस हादसे में रेत का एक बड़ा हिस्सा धंसने से दो रेलवे इंजीनियर मलबे में दब गए, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।
यह घटना रात लगभग 8 बजे हुई, जब निर्माण स्थल पर बॉक्स पुशिंग का कार्य चल रहा था। अधिकारियों के अनुसार, अचानक आसपास की जमीन धंस गई, जिससे दोनों इंजीनियर मलबे के नीचे फंस गए।
STORY | Two Railway engineers killed as earth caves in at under-construction underpass in Kota
— Press Trust of India (@PTI_News) May 29, 2026
Two railway engineers were killed after a portion of earth collapsed on them at an under-construction underpass on NH-52 near Dara Ghati in Rajasthan’s Kota district on Thursday… pic.twitter.com/mVqEvUbboa
बचाव कार्य की जानकारी
सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर का बयान
सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर सौरभ जैन ने बताया कि बचाव दल ने तुरंत इंजीनियरों को मलबे से निकालने के लिए ऑपरेशन शुरू किया। रेलवे के अधिकारी और कोटा नगर निगम के अग्निशामक दल भी मौके पर पहुंचे और राहत कार्य में जुट गए।
मृतकों की पहचान
कैसे हुई पहचान?
मृतकों की पहचान पंकज कुमार झा और प्रभात सिंह झा के रूप में हुई। दोनों को LNT और JCB मशीनों की सहायता से लगभग 10 से 15 मिनट की मेहनत के बाद बाहर निकाला गया और कोटा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
डॉक्टरों ने प्रभात सिंह झा को अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया, जबकि पंकज कुमार झा को बचाने की कोशिशों के बावजूद कुछ ही समय बाद उनकी भी मृत्यु हो गई। डॉक्टर राकेश जिंदल ने बताया कि मेडिकल टीम ने दोनों इंजीनियरों को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे नहीं बच पाए।
SDM का बयान
कानवास के SDM का बयान
कानवास के SDM बाबूलाल मीणा ने कहा कि जब यह हादसा हुआ, तब तक सभी मजदूर काम खत्म करके जा चुके थे। मौके पर केवल दोनों इंजीनियर निरीक्षण के लिए मौजूद थे। अधिकारियों के अनुसार, वे निर्माण कार्य का जायजा ले रहे थे, तभी अचानक जमीन धंस गई। पुलिस घटना की सूचना मिलने के 10 मिनट के भीतर मौके पर पहुंच गई।
हादसे का कारण
कैसे हुआ हादसा?
यह अंडरपास कोटा के दारा घाटी क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने के लिए बनाया जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि इस मार्ग पर हर दिन भारी वाहनों की आवाजाही होती है, जबकि क्षेत्र में केवल एक पुल है, जिससे अक्सर जाम लग जाता है। निर्माण का अधिकांश कार्य पहले ही पूरा हो चुका था और हादसे के समय कंक्रीट स्लैब डालने का काम चल रहा था।