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कोटा मेडिकल कॉलेज में माताओं की सेहत पर संकट: किडनी फेलियर के मामले बढ़े

राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज में सिजेरियन डिलीवरी के बाद माताओं की सेहत में गंभीर गिरावट आई है। 10 नई माताओं में किडनी फेल होने के मामले सामने आए हैं, जबकि तीन की जान जा चुकी है। परिवारों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए धरना प्रदर्शन किया है। जानें इस संकट के पीछे की पूरी कहानी और परिवारों की मांगें।
 

कोटा में माताओं की बिगड़ती सेहत


कोटा: राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज में सिजेरियन डिलीवरी के बाद माताओं की स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। अब तक 10 नई माताओं में किडनी फेल होने के मामले सामने आए हैं, और तीन महिलाओं की जान जा चुकी है। कई मरीज इस समय डायलिसिस और ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं।


परिवारों का प्रदर्शन

इन मामलों में अचानक वृद्धि ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में चिंता का माहौल बना दिया है। एक मृत महिला के परिवार ने पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया और अस्पताल के बाहर धरना प्रदर्शन किया, नवजात शिशु को गोद में लिए हुए।


परिजनों के आरोप

परिजनों ने क्या लगाया आरोप?


परिवार का कहना है कि महिला की मृत्यु अस्पताल की लापरवाही के कारण हुई है। इसलिए, वे तत्काल कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।


विरोध प्रदर्शन की स्थिति

विरोध प्रदर्शन के दौरान अस्पताल प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची। परिवार वालों को समझाने की कोशिश की गई, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के बीच तीखी बहस हुई, जिससे अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई।


परिजनों की मांगें

परिजनों ने क्या की मांग?


परिवार का कहना है कि नई मां की सेहत बिगड़ने के बावजूद उन्हें समय पर उचित चिकित्सा सहायता नहीं मिली। वे आरोप लगाते हैं कि अस्पताल प्रशासन अपनी लापरवाही को छिपाने की कोशिश कर रहा है। प्रदर्शनकारी परिवार ने घोषणा की कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होती और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे।


राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर मुद्दा

कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज और जे.के. लोन अस्पताल में नई माताओं की मौत और किडनी फेलियर के मामलों को लेकर पहले भी सवाल उठाए जा चुके हैं। लगातार बढ़ते मामलों के कारण अब यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।