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क्या होली से पहले किसानों को मिलेगी पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त?

देश के नौ करोड़ से अधिक किसान पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। पिछली किस्त नवंबर 2025 में आई थी, और अब किसान जानना चाहते हैं कि क्या उन्हें यह राशि होली से पहले मिलेगी। बैंक अवकाश और सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा की कमी के कारण किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। क्या यह आर्थिक सहायता त्योहार से पहले आएगी? जानें इस लेख में।
 

किसानों की नजरें केंद्र सरकार पर

नई दिल्ली: देश के नौ करोड़ से अधिक किसान एक बार फिर केंद्र सरकार की ओर देख रहे हैं। पिछली बार 19 नवंबर 2025 को पीएम किसान सम्मान निधि की राशि उनके बैंक खातों में पहुंची थी। तब से अब तक किसान अगली आर्थिक सहायता का इंतजार कर रहे हैं। आज 28 फरवरी है, जो महीने का अंतिम दिन है, लेकिन योजना की 22वीं किस्त का पैसा अभी तक किसानों के खातों में नहीं आया है।


बैंक अवकाश के कारण किस्त में देरी

कई किसानों को उम्मीद थी कि फरवरी के अंत में उन्हें राहत राशि मिल जाएगी। लेकिन आज महीने का चौथा शनिवार है, जिससे सभी बैंक बंद हैं। पीएम किसान योजना का पैसा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे किसानों के खातों में भेजा जाता है। चूंकि आज बैंकिंग प्रणाली पूरी तरह से अवकाश पर है, इसलिए खातों में पैसे आने की संभावना बहुत कम है। आमतौर पर छुट्टी के दिन इतनी बड़ी राशि का ट्रांसफर नहीं किया जाता है।


होली से पहले उम्मीदें कम

आज की निराशा के बाद किसानों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 4 मार्च को होने वाले होली के त्योहार से पहले यह पैसा उन्हें मिल पाएगा। अगर हम आने वाले दिनों के कैलेंडर पर नजर डालें, तो स्थिति स्पष्ट है। एक मार्च को रविवार है, जिससे बैंकों में फिर से अवकाश रहेगा। इसके बाद 2 मार्च को उत्तर प्रदेश में बैंक बंद रहेंगे और 3 मार्च को भी कई राज्यों में बैंकिंग सेवाएं ठप रहेंगी। इसके बाद 4 मार्च को होली का बड़ा सार्वजनिक अवकाश है। लगातार छुट्टियों को देखते हुए, होली से पहले किसानों को यह आर्थिक सहायता मिलने की संभावना बहुत कम है।


सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार

किस्त में देरी का एकमात्र कारण लगातार छुट्टियां नहीं हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्र सरकार ने अभी तक 22वीं किस्त जारी करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। बिना किसी पूर्व सूचना और बैंकिंग प्रणाली के लगातार अवकाश के कारण, होली से पहले इस पैसे के आने की उम्मीद लगभग समाप्त हो चुकी है, जिससे त्योहार से पहले किसानों की चिंता बढ़ गई है।