क्रांति गौड़: संघर्षों से भरी यात्रा और क्रिकेट में सफलता
क्रांति गौड़ की प्रेरणादायक कहानी
नई दिल्ली: भारतीय महिला क्रिकेट टीम इस समय इंग्लैंड में टी20 विश्व कप 2026 की तैयारी कर रही है। इस टीम में 22 वर्षीय तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ भी शामिल हैं, जिनकी यात्रा संघर्षों से भरी रही है। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा की रहने वाली क्रांति ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत में कई चुनौतियों का सामना किया।
क्रांति ने जियोस्टार पर साझा किया, "मैंने कभी क्रिकेट खेलने का इतना बड़ा सपना नहीं देखा था। मेरा गांव ऐसा है जहां लड़कियों को बाहर जाने की भी अनुमति नहीं है। लड़कियों को अपने सपनों का पीछा करने में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है।"
उन्होंने आगे कहा, "मैंने हमेशा सुना है कि मेहनत करने वाले कभी हार नहीं मानते। मैंने लगातार अभ्यास किया, सीखती रही और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा। मैंने अपने चारों ओर के नकारात्मकता को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। आज मैं इस मुकाम पर हूं और अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रही हूं।"
क्रांति ने अपने माता-पिता के समर्थन के बारे में बताया, "अगर परिवार आपके साथ है, तो बाहरी लोगों की राय मायने नहीं रखती। मेरे माता-पिता ने हमेशा मेरा समर्थन किया और मुझे कभी भी गलत नहीं महसूस होने दिया। उनका विश्वास मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था।"
उन्होंने कहा, "इस समर्थन ने मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। जब आपको पता होता है कि आपका परिवार आपके साथ है, तो बाहरी दुनिया की नकारात्मकता को नजरअंदाज करना आसान हो जाता है। मैं उनके समर्थन के लिए हमेशा आभारी रहूंगी।"
गौड़ ने यह भी बताया कि उनके वनडे विश्व कप में प्रदर्शन के कारण उनके गांव में एक क्रिकेट अकादमी खोली गई है। अब कई युवा लड़कियां वहां क्रिकेट खेलने आ रही हैं। यह उनके लिए गर्व का क्षण है, क्योंकि अब माता-पिता अपनी बेटियों को इस खेल में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।