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गुरुग्राम दंपति की IVF से जुड़ी दर्दनाक कहानी: बच्चों का DNA टेस्ट नकारता है माता-पिता का दावा

गुरुग्राम में एक दंपति ने IVF तकनीक से जुड़वां बच्चों को जन्म दिया, लेकिन जब DNA टेस्ट कराया गया, तो पता चला कि बच्चे उनके नहीं हैं। यह मामला न केवल उनके लिए एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि चिकित्सा प्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाता है। दंपति ने अस्पताल पर भ्रूण बदलने का आरोप लगाया है और न्याय की तलाश में हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें उन्होंने अन्य माता-पिता से अपील की है कि वे अपने बच्चों का DNA टेस्ट करवाएं। जानें इस दर्दनाक कहानी के सभी पहलू।
 

गुरुग्राम में माता-पिता बनने का सपना टूटा

गुरुग्राम: एक दंपति, जो माता-पिता बनने का सपना देख रहे थे, को एक चौंकाने वाला धोखा मिला है, जिसने चिकित्सा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। द्वारका एक्सप्रेसवे के पास रहने वाले राहुल राठौर और उनकी पत्नी मीनू राठौर पिछले पांच महीनों से परेशान हैं। उन्होंने आईवीएफ (IVF) तकनीक का सहारा लेकर जुड़वां बच्चों को जन्म दिया, लेकिन जब बच्चों का डीएनए (DNA) परीक्षण कराया गया, तो उन्हें पता चला कि बच्चे उनके नहीं हैं। अब यह दंपति अस्पताल, पुलिस और न्यायालय के चक्कर काटते हुए अपने असली बच्चों की खोज में जुटे हैं। प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने पर उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा साझा की है।


DNA रिपोर्ट ने स्थिति को किया स्पष्ट, अस्पताल पर गंभीर आरोप

राहुल राठौर ने बताया कि उन्होंने दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित 'एससीआई आईवीएफ अस्पताल' में आईवीएफ प्रक्रिया के माध्यम से माता-पिता बनने का निर्णय लिया था। उन्हें डिलीवरी के लिए द्वारका के 'मैक्स अस्पताल' भेजा गया। जुड़वां बच्चों के जन्म के बाद, जब दंपति ने संदेह के चलते डीएनए टेस्ट कराया, तो पता चला कि बच्चों का डीएनए न तो राहुल से और न ही मीनू से मेल खाता है। राहुल का आरोप है कि अस्पताल में भ्रूण या बच्चों की अदला-बदली की गई है। प्रारंभिक तीन महीनों तक पुलिस ने इस मामले में एफआईआर तक दर्ज नहीं की, जिसके बाद उन्हें न्याय के लिए साकेत कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।


पुलिस की लापरवाही और कोर्ट का सख्त रुख

राहुल ने इस मामले को मानव तस्करी से जोड़ते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने पहले डीएनए टेस्ट न करवाने का दबाव बनाया। जब रिपोर्ट सामने आई, तो अस्पताल ने कोर्ट में झूठे दस्तावेज पेश किए, जिसे कोर्ट ने फर्जी करार दिया। पीड़ितों का आरोप है कि अस्पताल के कर्मचारियों ने उन्हें सरोगेसी और पैसे का ऑफर दिया था। कोर्ट ने अस्पताल से उस दिन हुई सभी डिलीवरी का रिकॉर्ड मांगा है, लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी अस्पताल ने कागजात जमा नहीं किए हैं। पुलिस की ढीली कार्यप्रणाली से निराश होकर दंपति ने प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और दिल्ली के मुख्यमंत्री से भी न्याय की गुहार लगाई है और पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।


दंपति की अपील: अपने बच्चों का DNA टेस्ट करवाएं

न्याय प्रणाली और पुलिस से निराश होकर, दंपति ने एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने आम जनता और विशेष रूप से उन माता-पिता से अपील की है, जिन्होंने 2025 में एससीआई आईवीएफ अस्पताल से उपचार लिया हो या जिनके बच्चों का जन्म 5 जनवरी 2026 को मैक्स अस्पताल, द्वारका में हुआ हो। दंपति ने ऐसे सभी माता-पिता से अपने बच्चों का डीएनए टेस्ट करवाने की अपील की है। उनका कहना है कि हो सकता है कि उनके बच्चे किसी और के पास हों और किसी और के बच्चे उनके पास। राहुल और मीनू का स्पष्ट कहना है कि उनका मकसद किसी पर केस करना या आरोप लगाना नहीं है, वे बस अपने असली बच्चों तक पहुंचना चाहते हैं।