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गुरुग्राम में हिट एंड रन मामले में आरोपी की गिरफ्तारी, हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

गुरुग्राम में एक हिट एंड रन मामले में आरोपी कल्याण बैंसला को राजस्थान के दौसा से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इस मामले में हत्या के प्रयास की धाराएं भी जोड़ी हैं। पीड़िता सिया की बाइक पर लगे कैमरे के फुटेज ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। जानें इस मामले में कानून की क्या धाराएं लगाई गई हैं और पीड़ितों के लिए मुआवजे का प्रावधान क्या है।
 

गुरुग्राम में हिट एंड रन का मामला

गुरुग्राम: साइबर सिटी में एक दिल दहला देने वाले हिट एंड रन मामले में मुख्य आरोपी कल्याण बैंसला को पुलिस ने राजस्थान के दौसा से गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने आरोपी पर हत्या के प्रयास की गंभीर धाराएं भी लगाई हैं। यह कार्रवाई तब की गई जब पीड़िता सिया की बाइक पर लगे कैमरे से प्राप्त वीडियो फुटेज सामने आया, जिसमें स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि टक्कर के बाद कार चालक ने रुकने का प्रयास नहीं किया और पीड़िता को काफी दूर तक सड़क पर घसीटता रहा।


नया कानून: लापरवाही या जानबूझकर हमला?

सड़क दुर्घटना के बाद घायल को छोड़कर भाग जाना और पुलिस को सूचित न करना कानूनी रूप से हिट एंड रन की श्रेणी में आता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत, ऐसे मामलों में धारा 106 सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि चालक की लापरवाही से किसी की जान जाती है और वह घायल को अस्पताल पहुंचाने में मदद करता है, तो बीएनएस की धारा 106(1) के तहत अधिकतम 5 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, यदि चालक टक्कर मारकर भाग जाता है, तो धारा 106(2) के तहत 10 साल तक की सख्त सजा का प्रावधान है, जिसे सरकार ने हाल ही में रोक दिया है।


तेज रफ्तार और गंभीर चोटों पर कानूनी धाराएं

सड़क पर खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने पर बीएनएस की धारा 281 लगाई जाती है, जिससे दूसरों की जान को खतरा होता है। यदि किसी व्यक्ति को केवल चोट आती है, तो चोट की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग दंडात्मक धाराएं जोड़ी जाती हैं। गुरुग्राम जैसे मामलों में, जहां चालक ने जानबूझकर गाड़ी नहीं रोकी और पीड़िता को घसीटता रहा, पुलिस इसे सामान्य लापरवाही नहीं मानती, बल्कि इसे जानबूझकर चोट पहुंचाने का मामला मानती है। यही कारण है कि जांच एजेंसियां हत्या के प्रयास जैसी गैर-जमानती धाराएं जोड़ देती हैं।


मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालक की जिम्मेदारी

मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 134 स्पष्ट करती है कि दुर्घटना के तुरंत बाद चालक को गाड़ी रोकनी चाहिए और घायल को चिकित्सा सहायता प्रदान करनी चाहिए। यदि चालक मौके से भागता है या पुलिस से जानकारी छिपाता है, तो मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 187 के तहत अलग से सजा और जुर्माने का प्रावधान है। अक्सर सोशल मीडिया पर सात लाख रुपये के फिक्स जुर्माने की चर्चा होती है, जबकि असल में कानून में कोई निश्चित राशि नहीं है; अदालत अपराध की गंभीरता के अनुसार जुर्माना तय करती है।


जमानत की शर्तें और पीड़ितों के लिए मुआवजा

हिट एंड रन केस जमानती होगा या गैर-जमानती, यह पूरी तरह से लगी धाराओं और हादसे की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। यदि मामले में नशे में गाड़ी चलाना, तेज रफ्तार या जानबूझकर टक्कर मारने के सबूत मिलते हैं, तो अदालतें सख्त रुख अपनाते हुए जमानत याचिका खारिज कर देती हैं। वहीं, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 161 के तहत हिट एंड रन के पीड़ितों को सरकारी राहत का प्रावधान भी है। इसके तहत दुर्घटना में मौत होने पर पीड़ित परिवार को दो लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल होने पर 50 हजार रुपये तक का मुआवजा कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दिया जाता है।