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गोगुंदा में पंचायत के विवाद ने परिवार को बनाया सामाजिक बहिष्कार का शिकार

गोगुंदा के भूताला गांव में एक परिवार को पंचायत के विवाद के चलते सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा। 24 मई को आयोजित प्रसादी के बाद उठी आपत्तियों ने परिवार को 1 लाख 51 हजार रुपये का जुर्माना भरने के लिए मजबूर किया। आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए परिवार ने जुर्माना देने से इनकार किया, जिसके बाद पंचायत ने सामाजिक बहिष्कार का निर्णय लिया। परिवार ने न्यायालय का सहारा लिया, जिसके बाद 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और न्याय की तलाश में परिवार की स्थिति।
 

गांव में प्रसादी के आयोजन पर उठी आपत्ति


गोगुंदा के भूताला गांव के निवासी गणेश सिंह ने पुलिस को शिकायत में बताया कि 24 मई को उनके परिवार ने गांव के मंदिर में प्रसादी का आयोजन किया था। इस आयोजन के बाद कुछ स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई। इसके अगले दिन पंचायत बुलाई गई, जिसमें परिवार पर 1 लाख 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का आरोप लगाया गया।


परिवार की आर्थिक स्थिति पर उठे सवाल

परिवार ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए इतनी बड़ी राशि चुकाने में असमर्थता जताई। इसके बाद पंचायत ने कथित तौर पर परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया।


सामाजिक संबंधों पर रोक का आरोप

पीड़ित परिवार का कहना है कि पंचायत के निर्णय के बाद गांव के लोगों को उनसे बातचीत करने और किसी भी प्रकार के सामाजिक संबंध रखने से मना किया गया। परिवार ने इस फैसले का विरोध किया, जिसके बाद उन्हें गालियां दी गईं और मारपीट का भी सामना करना पड़ा। शिकायत में यह भी कहा गया है कि परिवार के सदस्यों को मंदिर और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर जाने से रोका गया, जिससे उन्हें सामाजिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।


अंतिम संस्कार के दौरान रास्ता रोकने का गंभीर आरोप

29 मई को एक सदस्य की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के लिए श्मशान ले जाते समय रास्ता रोकने का आरोप भी लगाया गया है। पीड़ित परिवार ने इस मामले की शिकायत स्थानीय पुलिस से लेकर उच्च अधिकारियों तक की, लेकिन शुरुआत में कोई कार्रवाई नहीं हुई।


न्यायालय के आदेश पर मामला दर्ज

पुलिस में कार्रवाई न होने के कारण परिवार ने न्यायालय का सहारा लिया। एएसआई विनेश कुमार के अनुसार, न्यायालय के आदेश के बाद 3 सितंबर को पांच प्रमुख पंचों सहित कुल 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपों की जांच शुरू कर दी है, और जांच के परिणामों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सामाजिक बहिष्कार, जुर्माने और रास्ता रोकने के आरोपों में कितनी सच्चाई है।