×

चंडीगढ़ में विकास परियोजनाओं को मिली नई गति, पर्यावरणीय मंजूरी का पुनर्गठन

चंडीगढ़ में कई विकास परियोजनाओं को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा नई गति मिली है। पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़ी समितियों के पुनर्गठन से सब्जी मंडी और बल्क मैटेरियल मार्केट जैसी योजनाओं को लाभ होगा। यह निर्णय न केवल व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा, बल्कि शहर में सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार में भी मदद करेगा। जानें इस नई व्यवस्था के तहत और कौन-कौन सी परियोजनाएं प्रभावित होंगी।
 

चंडीगढ़ में विकास परियोजनाओं को मिली राहत


चंडीगढ़ में कई विकास परियोजनाओं के लिए एक सकारात्मक खबर आई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने केंद्र शासित प्रदेश के लिए पर्यावरण मंजूरी से संबंधित दो महत्वपूर्ण समितियों का पुनर्गठन किया है। इस निर्णय से उन परियोजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है, जो पर्यावरणीय स्वीकृति के अभाव में लंबे समय से रुकी हुई थीं। इनमें नई सब्जी मंडी और बल्क मैटेरियल मार्केट जैसी योजनाएं शामिल हैं।


नई सब्जी मंडी को मिलेगा बड़ा लाभ

सेक्टर-39 में प्रस्तावित नई सब्जी मंडी परियोजना को इस निर्णय से सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। यह आधुनिक मंडी लगभग 76 एकड़ में विकसित की जाएगी, जो शहर की भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बनाई जा रही है। इस परियोजना के अंतर्गत कई भूखंडों की नीलामी पहले ही हो चुकी है, लेकिन पर्यावरणीय स्वीकृति न मिलने के कारण विकास कार्य शुरू नहीं हो पाए थे। अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रशासन को निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी। भविष्य में मौजूदा सब्जी मंडी को भी यहां स्थानांतरित करने की योजना है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर ढांचा मिल सकेगा।


बल्क मैटेरियल मार्केट की राह भी आसान

धनास स्थित मार्बल मार्केट को स्थानांतरित करने के लिए सेक्टर-56 में प्रस्तावित बल्क मैटेरियल मार्केट परियोजना को भी नई उम्मीद मिली है। इस योजना की लागत लगभग 22 करोड़ रुपये है, जिसके तहत करीब 200 शोरूम विकसित किए जाने हैं। यह परियोजना लंबे समय से पर्यावरण मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही थी, जिसके कारण काम आगे नहीं बढ़ सका। नई समितियों के गठन के बाद अब इस परियोजना की फाइलों पर तेजी से कार्रवाई होने की संभावना है। इससे व्यापारियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी और शहर में सुव्यवस्थित व्यावसायिक ढांचा विकसित होगा।


अन्य विकास परियोजनाओं को भी मिलेगी रफ्तार

नई पर्यावरणीय व्यवस्था का लाभ केवल बाजार परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा। अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और बड़े बुनियादी ढांचा विकास कार्यों को भी इसका फायदा मिलेगा। जिन परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य होती है, वे अब अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ सकेंगी। इससे निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और विकास कार्यों में आने वाली प्रशासनिक बाधाएं कम होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शहर में सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार की प्रक्रिया भी तेज होगी।


तीन वर्ष तक कार्य करेंगी नई समितियां

केंद्रीय मंत्रालय द्वारा गठित स्टेट एन्वायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी और एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी का कार्यकाल तीन वर्ष निर्धारित किया गया है। डॉ. हर्ष मित्तर को अथॉरिटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि डॉ. रणदीप सिंह सैनी सदस्य की भूमिका निभाएंगे। वहीं, एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी की कमान डॉ. अविनाश कुमार शारदा को सौंपी गई है। अथॉरिटी परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन करेगी, जबकि विशेषज्ञ समिति तकनीकी पहलुओं की जांच कर अपनी सिफारिशें देगी। इससे मंजूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनने की उम्मीद है।