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चाईबासा में वाहन दिलाने के नाम पर 34 लाख रुपये की ठगी का मामला

झारखंड के चाईबासा में वाहन दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। शंकराचार्य मोटर्स के तीन कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने ग्राहकों से पैसे लिए और डीलर प्रबंधन को जानकारी नहीं दी। इस मामले में 34 लाख 27 हजार रुपये की ठगी की गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी फरार हैं। जानें पूरी कहानी और क्या कार्रवाई की जा रही है।
 

चाईबासा में ठगी का मामला

चाईबासा। झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के चाईबासा में गाड़ियों की बिक्री के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इस मामले में गितिलिपी स्थित टाटा मोटर्स के डीलर शंकराचार्य मोटर्स के सेल्स मैनेजर सहित तीन कर्मचारियों के खिलाफ मुफस्सिल थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। डीलर प्रबंधन के अनुसार, ठगी की कुल राशि 34 लाख 27 हजार रुपये से अधिक है।


प्रबंधन की शिकायत पर मामला दर्ज

सूत्रों के अनुसार, महेश कुमार चौहान, जो कि संस्थान के प्रतिनिधि हैं, की लिखित शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(4), 318(4) और 61(2) के तहत पुलिस ने मामला दर्ज किया है। आरोपियों के बारे में बताया गया है कि वे पिछले चार महीनों से ड्यूटी पर नहीं आए हैं।


आरोपियों पर आरोपित राशि

सेल्स मैनेजर विदेश राय पर 22 लाख 16 हजार रुपये की हेराफेरी का आरोप है। वे पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के जामियारा के निवासी हैं। सेल्स रिप्रेजेंटेटिव अभिषेक कुमार सिंह पर नौ लाख 59 हजार रुपये की ठगी का आरोप है, जो सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर के रहने वाले हैं। इसके अलावा, सेल्स स्टाफ सद्गुरु पोद्दार उर्फ सूरज पोद्दार पर दो लाख 52 हजार रुपये के गबन का आरोप लगाया गया है।


ठगी का तरीका

शिकायत के अनुसार, तीनों आरोपियों ने कंपनी के नाम पर ग्राहकों से पुरानी गाड़ियां उपलब्ध कराने या नई गाड़ियों की बुकिंग के नाम पर सीधे नकद और अन्य माध्यमों से पैसे लिए। इस लेनदेन की जानकारी डीलर प्रबंधन को नहीं दी गई।


घोटाले का खुलासा

जानकारी के अनुसार, 14 मार्च 2026 को प्रबंधन को इस गड़बड़ी का पता चला। इसके बाद, कर्मचारियों की मौजूदगी में एक गुप्त सत्यापन अभियान चलाया गया, जिसमें पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ।


आरोपी फरार, पुलिस कार्रवाई जारी

इस घोटाले के खुलासे के बाद तीनों आरोपी कंपनी से संपर्क तोड़ चुके हैं। उनके फोन बंद हैं और वे कार्यालय नहीं आ रहे हैं। वहीं, जिन ग्राहकों से पैसे लिए गए थे, वे अब कंपनी पर भुगतान लौटाने का दबाव बना रहे हैं। वर्तमान में, मुफस्सिल थाना पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।