चिंतपूर्णी मंदिर में सुगम दर्शन प्रणाली में वित्तीय अनियमितता का मामला
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों की जांच जारी
चिंतपूर्णी माता मंदिर की सुगम दर्शन प्रणाली में डिजिटल लेनदेन में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। एक ही ट्रांजेक्शन आईडी से 80 संदिग्ध पास जारी किए गए हैं। पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।
एक ही ट्रांजेक्शन आईडी से कई पास जारी
मंदिर के अधिकारी संजीव कुमार की शिकायत पर चिंतपूर्णी थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है।
संजीव प्रभाकर द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, 19 जुलाई के कंप्यूटर रिकॉर्ड की जांच में कई प्रविष्टियां मिलीं, जिनमें भुगतान का माध्यम क्यूआर कोड था। जांच में यह भी पाया गया कि अलग-अलग पास के लिए एक ही ट्रांजेक्शन आईडी और मोबाइल नंबर का उपयोग किया गया था।
संदिग्ध पास की पहचान
सामान्य डिजिटल भुगतान प्रणाली में प्रत्येक यूपीआई भुगतान के साथ अलग ट्रांजेक्शन आईडी होती है। इसलिए एक ही पहचान संख्या का कई पास में उपयोग संदिग्ध प्रतीत होता है। 19 जुलाई की प्रविष्टियों से लगभग 80 संदिग्ध सुगम दर्शन पास चिह्नित किए गए हैं। उस दिन प्रत्येक पास के लिए 500 रुपए का शुल्क लिया गया था।
राजस्व नुकसान की आशंका
प्रारंभिक जांच में मंदिर न्यास को लगभग 40 हजार रुपए के संभावित राजस्व नुकसान का अनुमान है। मंदिर प्रशासन यह भी जांच करेगा कि क्या यह मामला साइबर धोखाधड़ी का है या इसमें किसी अंदरूनी स्तर पर अनियमितता हुई है।
गहन जांच जारी
पुलिस अधीक्षक सचिन हिरेमठ ने बताया कि सभी डिजिटल रिकॉर्ड और तकनीकी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही अनियमितता की वास्तविक प्रकृति और इसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान हो सकेगी।
एसडीएम अंब पारस अग्रवाल ने कहा कि यह कहना जल्दबाजी होगी कि मामला साइबर धोखाधड़ी का है या किसी कर्मचारी की संलिप्तता है।