छठ पूजा 2026: यात्रा के लिए विकल्प और चुनौतियाँ
छठ पूजा 2026:
छठ पूजा का नाम सुनते ही बिहार और पूर्वांचल के उन परिवारों की याद आती है, जो इस त्योहार को केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि अपने प्रियजनों से मिलने का एक महत्वपूर्ण अवसर मानते हैं। देश के विभिन्न शहरों में काम करने वाले लोग इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं। लेकिन इस बार घर लौटने का रास्ता आसान नहीं लग रहा है। ट्रेन में सीटें नहीं मिल रही हैं और हवाई यात्रा का खर्च आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है।
1. छठ से पहले ट्रेनों में सीट मिलना मुश्किल
छठ पूजा 13 से 16 नवंबर तक मनाई जाएगी। इस दौरान अधिकांश यात्री 11 और 12 नवंबर तक अपने घर पहुंचना चाहते हैं। दिल्ली से पटना, दरभंगा और सहरसा जाने वाली कई ट्रेनों में सीटें उपलब्ध नहीं हैं। तेजस, संपूर्ण क्रांति, विक्रमशिला, पूर्वा, वैशाली, बिहार संपर्क क्रांति और सप्त क्रांति जैसी ट्रेनों में भी टिकट मिलना कठिन हो गया है। तत्काल टिकट पर भी भारी दबाव है, जिससे अंतिम समय में यात्रा की योजना बनाने वालों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
2. फ्लाइट का किराया पहुंचा आम आदमी की पहुंच से बाहर
ट्रेन में जगह नहीं मिलने के कारण कई लोग हवाई यात्रा का विकल्प चुन रहे हैं, लेकिन यहां भी राहत नहीं है। सामान्य दिनों में दिल्ली से पटना या दरभंगा का हवाई किराया लगभग 4,000 से 6,000 रुपये होता है, जबकि त्योहार के दौरान यह बढ़कर 15,000 से 20,000 रुपये तक पहुंच गया है। मुंबई और बेंगलुरु से बिहार जाने वाली उड़ानों का किराया 25,000 से 35,000 रुपये या उससे अधिक हो रहा है।
3. प्राइवेट बसों का किराया भी तेजी से बढ़ा
ट्रेन और फ्लाइट के महंगे विकल्पों के बीच यात्रियों की निर्भरता बसों पर बढ़ रही है। लेकिन त्योहारी मांग का असर यहां भी दिखाई दे रहा है। दिल्ली NCR से बिहार जाने वाली कुछ प्राइवेट बसों का किराया सामान्य दिनों की तुलना में तीन गुना तक बढ़ गया है। जिन टिकटों की कीमत आम दिनों में 840 से 2,000 रुपये होती है, उनके लिए यात्रियों को 2,500 से 4,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
4. एक ही सफर में बदल सकते हैं ट्रेनें
यदि सीधी ट्रेन में टिकट नहीं मिल रहा है, तो यात्री कनेक्टिंग ट्रेन का विकल्प देख सकते हैं। इसमें किसी एक स्टेशन तक पहली ट्रेन से पहुंचकर वहां से बिहार जाने वाली दूसरी ट्रेन पकड़ी जा सकती है। इससे सीधे रूट पर सीट नहीं मिलने के बावजूद यात्रा का रास्ता निकल सकता है। इसके अलावा, राज्य परिवहन निगम की बसें भी एक अच्छा विकल्प हो सकती हैं। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम ने त्योहार के दौरान यात्रियों के लिए सैकड़ों बसें चलाई हैं। इनकी जानकारी और टिकट BSRTC की वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती हैं।
5. कारपूलिंग से भी कम हो सकता है सफर का खर्च
यात्रियों के पास BlaBlaCar जैसी कारपूलिंग सेवाओं का विकल्प भी मौजूद है। इस प्लेटफॉर्म पर कार मालिक अपनी यात्रा की तारीख, रास्ता और खाली सीटों की जानकारी साझा करते हैं। यात्री अपनी जरूरत के अनुसार उपलब्ध राइड तलाश सकते हैं और प्रति सीट तय किराया देकर सफर कर सकते हैं। हालांकि, राइड बुक करने से पहले चालक की जानकारी, यात्रा का पूरा रूट और सुरक्षा से जुड़ी बातों की जांच करना आवश्यक है। समय रहते विकल्प तलाशने से त्योहार पर घर पहुंचने की उम्मीद बनी रह सकती है।