जंतर मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन: क्या है आगे की रणनीति?
छात्रों का प्रदर्शन जंतर मंतर पर
बुधवार की शाम, छात्रों के विभिन्न समूह जंतर मंतर पर एकत्र हुए। उन्होंने लगभग दो घंटे तक प्रदर्शन किया, लेकिन उत्साह की कमी नजर आई। ये छात्र वामपंथी दलों से जुड़े हुए थे। उल्लेखनीय है कि कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को भी वामपंथी दलों का समर्थन प्राप्त था। आईसा, एआईएसएफ और एसएफआई के छात्र इस आंदोलन में शामिल हुए थे। आईसी के तीन छात्रों ने 21 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। इसके बाद आईसा की नेता नेहा का नाम चर्चा में आया, जिन्होंने बिहार जाकर प्रदर्शनकारी छात्रों की रिहाई की मांग की। हालांकि, अब ऐसा प्रतीत नहीं होता कि जंतर मंतर पर कोई बड़ा छात्र आंदोलन जल्द शुरू होगा। ध्यान देने योग्य है कि आंदोलन समाप्त होने के दिन अभिजीत दिपके ने कहा था कि उन्हें कुछ समय चाहिए ताकि वे आगे की रणनीति बता सकें।
आंदोलन की स्थिति और भविष्य
सूत्रों के अनुसार, अभिजीत दिपके अमेरिका चले गए हैं। वहीं, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह दिल्ली में हैं, लेकिन वे अकेले कोई आंदोलन खड़ा करने में असमर्थ हैं। दूसरी ओर, पुलिस और सरकार ने जंतर मंतर पर छात्रों और युवाओं को फिर से बैठने से रोकने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। इस आंदोलन की एक खासियत यह थी कि यह डिजिटल रूप से जुड़ा हुआ था, और युवा छात्र अब भी सोशल मीडिया के माध्यम से सक्रिय हैं। लेकिन वे सड़क पर उतरने के लिए तैयार नहीं हैं। यदि सरकार प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे हटाने में शर्तें लगाती है या सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के आधार पर कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर की जांच जारी रखती है, तो छात्रों की स्थिति और कठिन हो जाएगी। अब छात्रों की उम्मीद इस बात पर टिकी है कि सरकार वादे के अनुसार सभी को राहत देगी। सवाल यह है कि यदि सरकार राहत नहीं देती है, तो युवा क्या कदम उठाएंगे? वे संकेत दे रहे हैं कि भले ही वे आंदोलन के लिए सड़क पर नहीं उतरें, लेकिन सरकार का विश्वासघात उन्हें याद रहेगा।