जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन में नए नियम: जानें क्या बदलने वाला है
महत्वपूर्ण दस्तावेजों का रजिस्ट्रेशन
नई दिल्ली: जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र हमारे दैनिक जीवन में अत्यंत आवश्यक दस्तावेज हैं। बच्चे के स्कूल में दाखिले से लेकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने तक, जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार, मृत्यु प्रमाण पत्र का उपयोग परिवार के बैंक खातों और संपत्ति से संबंधित कार्यों में किया जाता है। अब इन दोनों दस्तावेजों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में बदलाव होने जा रहा है, जिसका प्रभाव देरी से रजिस्ट्रेशन कराने वालों पर पड़ेगा।
1969 के अधिनियम में संशोधन
हाल ही में जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) विधेयक 2026 को संसद से स्वीकृति मिली है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद, इसके प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। इसके साथ ही, जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन से संबंधित 1969 के मूल अधिनियम में बदलाव किए जाएंगे। नए नियमों के अनुसार, यदि जानकारी में देरी होती है, तो रजिस्ट्रेशन के लिए विभिन्न स्तरों की अनुमति और सत्यापन प्रक्रिया अपनानी होगी।
एक साल बाद रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक मंजूरी
नए नियमों के तहत, यदि जन्म या मृत्यु की जानकारी एक साल के बाद, लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है, तो रजिस्ट्रेशन के लिए संबंधित प्रशासनिक अधिकारी का आदेश आवश्यक होगा। इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट आदेश जारी कर सकते हैं। इसके साथ ही, सत्यापन और निर्धारित शुल्क की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।
दो साल की देरी पर न्यायालय की आवश्यकता
यदि जन्म या मृत्यु की जानकारी दो साल के बाद दी जाती है, तो रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और जटिल हो जाती है। ऐसे मामलों में, रजिस्ट्रेशन केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर किया जाएगा। इसका मतलब है कि दो साल से अधिक की देरी होने पर संबंधित व्यक्ति को न्यायिक स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। नए नियमों में देरी की अवधि के आधार पर यह भिन्नता रखी गई है, जिससे समय पर रजिस्ट्रेशन की महत्ता बढ़ जाती है।
रिकॉर्ड को सुधारने पर ध्यान
जन्म और मृत्यु का सही रिकॉर्ड सरकारी स्तर पर कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए आवश्यक होता है। इसी कारण से रजिस्ट्रेशन में देरी होने पर प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने का प्रावधान किया गया है। सरकार के अनुसार, नियमों में बदलाव का उद्देश्य जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक सटीक, पारदर्शी और समय पर तैयार करना है। नए नियम लागू होने के बाद, देरी से रजिस्ट्रेशन कराने वालों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित अधिकारी या न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी लेनी होगी।