जिमखाना क्लब की लीज समाप्त, विवादों का नया दौर शुरू
जिमखाना क्लब की लीज का विवाद
केंद्र सरकार ने जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ भूमि की लीज समाप्त कर दी है और क्लब को नोटिस दिया है कि इसे 5 जून तक खाली कर दिया जाए। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सुरक्षा कारणों से कुछ बुनियादी ढांचे का निर्माण आवश्यक है, जिसके लिए यह भूमि चाहिए। दूसरी ओर, क्लब के सदस्य इस नोटिस के खिलाफ अदालत में गए हैं। हालांकि, असली कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है कि जिमखाना क्लब को क्यों हटाया जा रहा है।
कुछ लोग इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं और इसके पीछे विभिन्न कारण बता रहे हैं। एक व्यक्ति ने कहा कि प्रधानमंत्री को हमेशा असुरक्षा का अनुभव होता है, इसलिए वे जिमखाना क्लब को अपने आवासीय परिसर में शामिल करना चाहते हैं। वहीं, कुछ का कहना है कि क्लब में होने वाली पार्टियों से लोक कल्याण मार्ग के निवासियों को परेशानी होती है।
इसके विपरीत, कुछ लोग क्लब के हटाए जाने का स्वागत कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह ब्रिटिश साम्राज्य की निशानी है और इसे हटाना चाहिए। एक मंत्री ने कहा कि जब किसानों से भूमि मांगी जाती है, तो वे दे देते हैं, इसलिए एलीट वर्ग को भी इसे खाली कर देना चाहिए।
दिल्ली में इस मुद्दे पर बहस चल रही है कि जिमखाना क्लब रहना चाहिए या नहीं। सरकार के लिए यह स्थिति सुविधाजनक है क्योंकि इससे ध्यान बंटता है। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि, महंगाई, और अन्य मुद्दों के बीच जिमखाना क्लब का मामला सरकार के लिए फायदेमंद है।
हालांकि, जिमखाना क्लब के हटाने के पक्ष में दिए गए तर्क कमजोर और बचकाने हैं। यदि यह तर्क मान्य है कि यह क्लब विशेषाधिकार प्राप्त लोगों के लिए है, तो दिल्ली के अन्य क्लबों को भी बंद किया जाना चाहिए।
ब्रिटिश काल में बने होने का तर्क भी निराधार है। क्या इसका निर्माण भारतीय संसाधनों से नहीं हुआ था? यदि सभी ब्रिटिश काल की निशानियों को मिटाना है, तो लुटियन की दिल्ली के सभी बंगलों को भी तोड़ना होगा।
एक और तर्क यह है कि क्लब दारू का अड्डा है, लेकिन क्या संसद भवन के सामने स्थित अन्य क्लबों को भी इसी आधार पर हटाया जाएगा? यह तर्क भी असंगत है।
सुरक्षा का मुद्दा भी उतना महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए एसपीजी केवल प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए है।
अंत में, यह स्पष्ट है कि यदि प्रधानमंत्री को जिमखाना क्लब बंद करने का निर्णय लेना है, तो वह ऐसा कर सकते हैं। लेकिन इस निर्णय को सही ठहराने के लिए दिए गए तर्कों में कोई ठोसता नहीं है।