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डिजिटल लेनदेन में भारत-भूटान की नई साझेदारी

भारतीय विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने भूटान के दौरे के दौरान डिजिटल लेनदेन को सरल बनाने के लिए यूपीआई का नया चरण शुरू किया है। इस पहल से भूटान से भारत आने वाले नागरिक बिना नकद लेनदेन के सीधे डिजिटल भुगतान कर सकेंगे। इसके अलावा, भारत ने भूटान के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियां और डेयरी गायें भी प्रदान की हैं। दोनों देशों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने के लिए स्कॉलरशिप योजना का विस्तार किया गया है। जानें इस महत्वपूर्ण दौरे के अन्य पहलुओं के बारे में।
 

भूटान दौरे पर डॉ एस जयशंकर

भारतीय विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर वर्तमान में भूटान के दौरे पर हैं, जहां से कई महत्वपूर्ण समाचार सामने आ रहे हैं। भारत का यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) अब वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। भारत और भूटान के बीच डिजिटल लेनदेन को पूरी तरह से दोतरफा प्रणाली में परिवर्तित कर दिया गया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोपगे ने इंटरनेशनल यूपीआई के दूसरे चरण का औपचारिक शुभारंभ किया है। इस पहल का मुख्य लाभ यह है कि भूटान से भारत आने वाले लोग बिना किसी नकद लेनदेन के सीधे अपने बैंक खातों और यूपीआई के माध्यम से भारत में कहीं भी डिजिटल भुगतान कर सकेंगे। पहले भूटान में भारतीय नागरिकों के लिए यूपीआई सेवा शुरू की गई थी, और अब इसे दोनों देशों के नागरिकों के लिए उपलब्ध कराया गया है।


डिजिटल पेमेंट की नई कनेक्टिविटी

इस दूसरे चरण के आरंभ से दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान की कनेक्टिविटी पूरी तरह से सहज हो जाएगी। डॉ एस जयशंकर ने इस ऐतिहासिक कदम की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि यह सहयोग दोनों देशों के नागरिकों के लिए लेनदेन को सरल और आधुनिक बनाएगा। यूपीआई के अलावा, भारत और भूटान हरित क्रांति के क्षेत्र में भी सहयोग कर रहे हैं। डिजिटल क्रांति के साथ, भारत ने भूटान के स्थायी और हरित परिवहन दृष्टिकोण को भी महत्वपूर्ण समर्थन दिया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भूटान के प्रधानमंत्री तोपगे को 54 मेड इन इंडिया इलेक्ट्रिक गाड़ियां भी भेंट की हैं। यह कदम दर्शाता है कि भारत अपने पड़ोसी देशों को ई-मोबिलिटी और पर्यावरण संरक्षण में आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रहा है।


शिक्षा और डेयरी क्षेत्र में सहयोग

इसके अलावा, शिक्षा और डेयरी क्षेत्रों में भी दोनों देशों ने नई संभावनाओं को साकार किया है। इसके लिए दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण स्कॉलरशिप योजना के विस्तार पर सहमति बनी है। नेहरू वांगचुक स्कॉलरशिप योजना के तहत भूटान के प्रतिभाशाली छात्र भारत के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए, भारत ने भूटान को 43 प्योर लाइन जर्सी गाय भी प्रदान की हैं। इस दौरे के दौरान, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ऐतिहासिक वांगडू चोलिंग पैलेस का दौरा किया और भूटान के पवित्र कोंगजोई लहांगथांग में पूजा अर्चना भी की। दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी सांस्कृतिक संबंधों को सम्मानित किया जा रहा है।


भारत-भूटान के रिश्ते

डॉ एस जयशंकर ने भूटान के राजा से भी मुलाकात की है। भारत की पड़ोसी पहले नीति के तहत, भारत और भूटान के संबंध अब पारंपरिक से आगे बढ़कर कूटनीतिक, तकनीकी, स्थायी ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था के मॉडल पर काम कर रहे हैं।