डॉ. गुरसागर सिंह सहोता: लिवर ट्रांसप्लांट में युवा प्रतिभा
लिवर गुरु की प्रेरणादायक यात्रा
आनंदपुर साहिब, पंजाब से निकलकर, डॉ. गुरसागर सिंह सहोता ने देश के सबसे युवा लिवर ट्रांसप्लांट सर्जनों में अपनी पहचान बनाई है। उनकी सर्जिकल कुशलता और सेवा भावना के चलते उन्होंने 550 से अधिक सफल लिवर ट्रांसप्लांट किए हैं, जिसके कारण उन्हें 'लिवर गुरु' के नाम से जाना जाता है।
अंगदान के प्रति जागरूकता का प्रयास
डॉ. सहोता केवल जटिल सर्जरी करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अंगदान के महत्व को भी बढ़ावा दे रहे हैं। उनका मानना है कि अंगदान से कई लोगों को नया जीवन मिल सकता है, इसलिए वे चिकित्सा सेवा के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता अभियानों में भी सक्रिय हैं।
शिक्षा और करियर की शुरुआत
डॉ. सहोता की प्रारंभिक शिक्षा नंगल मॉडल सरकारी स्कूल में हुई। इसके बाद, उन्होंने लुधियाना के डीएमसी अस्पताल से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। सर्जरी में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए उन्होंने लखनऊ के केजीएमसी में अध्ययन किया और एम्स की प्रवेश परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक-2 हासिल कर गोल्ड मेडल जीता।
पंजाब का आत्मनिर्भर लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर
भोपाल के एक निजी अस्पताल में तीन साल काम करने के बाद, डॉ. सहोता 2024 में लुधियाना के डीएमसी अस्पताल लौटे। यहां उन्होंने पंजाब का पहला लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया, जिसमें किसी बाहरी विशेषज्ञ की आवश्यकता नहीं पड़ी। यह उपलब्धि राज्य के चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने में सहायक रही।
विभिन्न आयु वर्ग के मरीजों की जान बचाई
अपने करियर में, डॉ. सहोता ने कई चुनौतीपूर्ण ट्रांसप्लांट किए हैं। 2023 में, उन्होंने तीन साल के बच्चे का सफल ट्रांसप्लांट किया, जिसमें बच्चे के पिता ने अपने लिवर का हिस्सा दान किया। इसके अलावा, उन्होंने 69 वर्षीय बुजुर्ग का भी सफल ट्रांसप्लांट किया।
अंगदान के लिए जागरूकता अभियान
डॉ. सहोता 2021 से सोशल मीडिया और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से लिवर संबंधी बीमारियों और अंगदान के महत्व के बारे में जागरूकता फैला रहे हैं। 'अजूनी लाइफ लाइन वेलफेयर सोसाइटी' के माध्यम से, वे लोगों को समझाते हैं कि अंगदान किसी जरूरतमंद को नया जीवन देने का सबसे बड़ा साधन हो सकता है।
परिवार का समर्थन और सेवा का संकल्प
डॉ. सहोता की सफलता में उनके परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान है। उनकी पत्नी, जो एक रिसर्च फार्मासिस्ट हैं, हर कदम पर उनका साथ देती हैं। उनका एक बेटा भी है। आधुनिक चिकित्सा तकनीक, समर्पण और समाज सेवा की भावना के साथ, डॉ. गुरसागर सिंह सहोता लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।