ढाका विश्वविद्यालय में जिन्ना की तस्वीरों पर विवाद: जांच शुरू
जिन्ना की तस्वीरों का मामला
ढाका विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने हाल ही में संस्थान के संग्रहालय में पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरें लगाने के मामले की जांच शुरू की है। इन तस्वीरों के प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं, और छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। जमात-ए-इस्लामी के छात्र संगठन, इस्लामी छात्र शिविर, ने रविवार को विश्वविद्यालय के पुनर्व्यवस्थित संग्रहालय को फिर से खोला, जिसमें जिन्ना और उपमहाद्वीप के राजनीतिक इतिहास से संबंधित तस्वीरें और समाचार पत्रों की कतरनें शामिल हैं.
विरोध और निंदा
संग्रहालय में 1948 में ढाका के रेसकोर्स मैदान में जिन्ना द्वारा दिए गए भाषण की एक तस्वीर भी प्रदर्शित की गई है, जिसमें उन्होंने उर्दू को पाकिस्तान की एकमात्र राजकीय भाषा घोषित किया था। इस पर विभिन्न छात्र संगठनों ने विरोध जताया। सोमवार को, एक छात्र ने जिन्ना की तस्वीरें फाड़ दीं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के छात्र संगठन जातयताबादी छात्र दल (जेसीडी) ने भी इन तस्वीरों की निंदा की और इसे 'शर्मनाक हरकत' करार दिया, यह कहते हुए कि इससे विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचा है.
जांच समिति का गठन
ढाका विश्वविद्यालय ने इस मामले की जांच के लिए एक पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। विश्वविद्यालय के जन संपर्क विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि समिति का गठन बिना अनुमति और विवादास्पद तरीके से तस्वीरों के प्रदर्शन की जांच के लिए किया गया है। प्रो वाइस चांसलर प्रोफेसर मोहम्मद अलमुजद्दादे अलफसाने की अध्यक्षता वाली समिति को यह पता लगाने का कार्य सौंपा गया है कि तस्वीरें कैसे और क्यों लगाई गईं।
जिन्ना का इतिहास
जिन्ना ने 1948 में पूर्वी बंगाल (बांग्लादेश) का दौरा किया था, जहां उन्होंने रेसकोर्स मैदान में घोषणा की थी कि पाकिस्तान की राजकीय भाषा केवल उर्दू होगी, जबकि पूर्वी पाकिस्तान में बांग्ला बोलने वालों की संख्या अधिक थी। इसके तीन दिन बाद, उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय में भी यही बात दोहराई। स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, संग्रहालय में जिन्ना के भाषण की तस्वीर, 1940 के लाहौर प्रस्ताव से संबंधित सामूहिक तस्वीर और 1970 के आम चुनाव पर पाकिस्तान के डॉन अखबार की एक कतरन शामिल है.
विरोध प्रदर्शन
सोमवार को, उर्दू विभाग के चौथे वर्ष के छात्र अबू तैयब हबिलदार ने संग्रहालय में जिन्ना की तस्वीरें फाड़ दीं, यह कहते हुए कि जिन्ना ने बांग्ला का विरोध किया था, इसलिए उन्हें विश्वविद्यालय में महिमामंडित नहीं किया जाना चाहिए। इस विवाद के चलते, वामपंथी झुकाव वाले बांग्लादेश छात्र फेडरेशन के छात्रों ने जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख गुलाम आजम की तस्वीर लगाई, जो तब की है जब उन्हें जूतों से पीटा गया था.
गुलाम आजम का संदर्भ
गुलाम आजम 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान पूर्वी पाकिस्तान में जमात-ए-इस्लामी के एक प्रमुख नेता थे और बाद में बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध अधिकरण ने उन्हें मानवता के विरुद्ध अपराधों का दोषी ठहराया था। जमात-ए-इस्लामी ने 1971 में पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान की आजादी का विरोध किया था.