तेज प्रताप यादव की कानूनी मुश्किलें बढ़ीं, बिहार बंद के दौरान हिंसा का मामला
पटना में तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी
पटना: बिहार बंद के दौरान पटना में हुई हिंसा के चलते जनशक्ति जनता दल (JJD) के नेता तेज प्रताप यादव की कानूनी समस्याएं बढ़ गई हैं। पटना पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें धारा 109 भी शामिल है, जो हत्या की कोशिश से संबंधित है। यदि अदालत में यह आरोप साबित होता है, तो उन्हें 10 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है। गंभीर चोट के मामले में सजा उम्रकैद तक बढ़ सकती है।
पटना की अदालत ने तेज प्रताप यादव को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जिसके बाद उन्हें बेऊर केंद्रीय कारागार में रखा गया है। उन्हें शनिवार शाम को पटना के एक शॉपिंग मॉल से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां न्यायिक हिरासत का आदेश दिया गया।
पुलिस की जानकारी
पुलिस ने क्या बताया?
पुलिस के अनुसार, यह मामला बिहार बंद के दौरान गांधी मैदान क्षेत्र में हुई हिंसा से संबंधित है। प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस का कहना है कि भीड़ के हिंसक व्यवहार ने लोगों की जान को खतरे में डाल दिया।
बिहार बंद का आह्वान कथित NEET पेपर लीक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में किया गया था। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी गांधी मैदान के आसपास इकट्ठा हुए थे। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान स्थिति हिंसक हो गई और सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया।
कानूनी कार्रवाई की जानकारी
किन लोगों पर लिया गया एक्शन?
गांधी मैदान थाना कांड संख्या 400/26 में तेज प्रताप यादव सहित अन्य व्यक्तियों को नामजद किया गया है। इसके अलावा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित कानून Prevention of Damage to Public Property Act, 1984 की धारा 3 और 4 भी शामिल की गई हैं।
पुलिस का कहना है कि हिंसा से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, तेज प्रताप यादव के वकील ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पुलिस ने उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही अदालत में जमानत याचिका दायर की जाएगी।
फिलहाल, मामला जांच के अधीन है और अदालत में सुनवाई के दौरान साक्ष्यों के आधार पर यह तय होगा कि आरोप सिद्ध होते हैं या नहीं। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय सामने आएगा।