तेलंगाना में मानसून की स्थिति: बारिश का इंतजार जारी
जेट स्ट्रीम का प्रभाव: मानसून में देरी
नई दिल्ली: देशभर में लोग मानसून की प्रतीक्षा कर रहे हैं। दक्षिण पश्चिमी मानसून ने 4 जून को भारत में प्रवेश किया था और प्रारंभ में इसकी गति सामान्य थी। 9 जून तक यह सही दिशा में आगे बढ़ रहा था, लेकिन इसके बाद इसकी गति में बदलाव आया है।
वर्तमान में, तेलंगाना के भद्राचलम में मानसून रुका हुआ है, जो पिछले छह दिनों से ऐसा ही है। इस स्थिति के कारण अन्य क्षेत्रों में बारिश की कमी और गर्मी बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों ने इसे चिंताजनक बताया है, क्योंकि यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो धान की रोपाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। भारत में धान का उत्पादन मानसून पर निर्भर करता है।
मानसून की संभावित प्रगति
मौसम मॉडल के अनुसार, इस सप्ताह के अंत तक बारिश की गतिविधियों में सुधार की संभावना है। जेट स्ट्रीम का मौजूदा पैटर्न कमजोर होने पर मानसूनी हवाएं तेज हो सकती हैं। अगले 4-5 दिनों में, महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और अन्य क्षेत्रों में मानसून की प्रगति की संभावना है।
जेट स्ट्रीम वायुमंडल की ऊपरी परतों में बहने वाली तेज हवाएं होती हैं, जो आमतौर पर पृथ्वी की सतह से 8 से 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर होती हैं। ये मानसून और पश्चिमी विक्षोभ को प्रभावित करती हैं।
बारिश में कमी का आंकड़ा
मौसम विभाग के अनुसार, 4 से 15 जून के बीच देश में सामान्य 53.7 मिमी बारिश के मुकाबले केवल 19.2 मिमी बारिश हुई है, जो 64% की कमी दर्शाता है। मानसून की कमजोरी का कारण समुद्र में नमी की कमी नहीं, बल्कि ऊपरी वायुमंडल की हवाओं का असामान्य पैटर्न है। इस बार पश्चिमी जेट स्ट्रीम सामान्य से अधिक दक्षिण की ओर खिसक गई है, जिससे मानसून को आगे बढ़ाने वाली हवाएं प्रभावित हो रही हैं।