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दिल्ली जिमखाना क्लब को जमीन खाली करने का नोटिस, सियासत में हलचल

दिल्ली के ऐतिहासिक जिमखाना क्लब को केंद्र सरकार ने अपनी 27.3 एकड़ की भूमि खाली करने का नोटिस दिया है, जिससे राजनीतिक हलचल मच गई है। आम आदमी पार्टी ने इस कदम के खिलाफ मोर्चा खोला है, जबकि क्लब प्रबंधन कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहा है। जानें इस विवाद के पीछे की वजहें और इसके ऐतिहासिक महत्व के बारे में।
 

दिल्ली जिमखाना क्लब पर केंद्र सरकार का बड़ा कदम


नई दिल्ली: दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित ऐतिहासिक 'दिल्ली जिमखाना क्लब' को केंद्र सरकार ने अपनी महत्वपूर्ण भूमि को खाली करने का नोटिस जारी किया है। इस निर्णय के बाद दिल्ली की राजनीति में हलचल मच गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।


आम आदमी पार्टी का तीखा हमला

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर कड़ा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बिना किसी पुनर्वास योजना के लोगों को उजाड़ने में लगी है। भारद्वाज ने कहा कि इस सरकार ने सत्ता में आने के बाद से केवल लोगों को विस्थापित किया है, किसी को बसाने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि पहले गरीबों और दुकानदारों को निशाना बनाया गया, और अब क्लब के अमीर सदस्यों की बारी आई है।


27 एकड़ भूमि का खाली करने का आदेश

यह विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने क्लब को एक आधिकारिक पत्र भेजा। इस पत्र में क्लब को 2 सफदरजंग रोड पर स्थित अपनी 27.3 एकड़ की संपत्ति को 5 जून तक पूरी तरह खाली करने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने इस ऐतिहासिक भूमि को वापस लेने के पीछे गंभीर कारण बताए हैं।


सुरक्षा और रक्षा के लिए भूमि की आवश्यकता

भूमि एवं विकास कार्यालय द्वारा 22 मई को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि यह संपत्ति राष्ट्रीय राजधानी के एक संवेदनशील क्षेत्र में आती है। केंद्र सरकार का कहना है कि देश के रक्षा ढांचे को मजबूत करने और अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए इस भूमि की तत्काल आवश्यकता है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


क्लब की कानूनी लड़ाई की तैयारी

इस बीच, क्लब के प्रबंधन ने सरकार के आदेश के खिलाफ अदालत में जाने का निर्णय लिया है। क्लब के वरिष्ठ सदस्य सिद्धार्थ ने मीडिया को बताया कि यह क्लब देश की आजादी से भी पुराना है और इसके हजारों सम्मानित सदस्य हैं। उन्होंने सरकार के सुरक्षा खतरे के दावे को खारिज करते हुए कहा कि वे इस आदेश के खिलाफ न्यायालय में अपील करेंगे।


1913 का ऐतिहासिक क्लब

दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना 1913 में 'इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब' के रूप में हुई थी। आजादी के बाद इसका नाम बदलकर दिल्ली जिमखाना क्लब रखा गया। इसके अधिकांश ढांचे 1930 के दशक में बने थे। इस क्लब के सदस्यों में देश के शीर्ष नौकरशाह, विदेशी राजनयिक, सैन्य अधिकारी, कैबिनेट मंत्री और बड़े उद्योगपति शामिल हैं। हालांकि, यह क्लब पहले भी वित्तीय अनियमितताओं और पक्षपात के आरोपों के कारण विवादों में रहा है।