दिल्ली जिमखाना क्लब जमीन विवाद: केंद्र सरकार का आश्वासन
दिल्ली जिमखाना क्लब का विवाद
नई दिल्ली: दिल्ली जिमखाना क्लब के भूमि विवाद ने एक नया मोड़ लिया है। केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय को आश्वासन दिया है कि यदि क्लब 5 जून तक अपनी भूमि नहीं छोड़ता है, तो भी वह जबरदस्ती कब्जा नहीं करेगी। मंगलवार को हुई सुनवाई में, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि 5 जून की तारीख क्लब द्वारा स्वेच्छा से भूमि खाली करने के लिए है, न कि जबरदस्ती के लिए।
क्लब के खिलाफ एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें मांग की गई थी कि सफदरजंग रोड पर स्थित 27.3 एकड़ भूमि को खाली किया जाए। इस आदेश के बाद, क्लब ने सरकार के नोटिस के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
कानूनी प्रक्रिया का पालन
सॉलिसिटर मेहता ने अदालत को बताया कि यदि क्लब निर्धारित तिथि तक भूमि नहीं सौंपता है, तो सरकार उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करेगी। उन्हें जबरदस्ती नहीं हटाया जाएगा। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या इस बयान को आधिकारिक रूप से दर्ज किया जा सकता है, जिस पर मेहता सहमत हो गए।
अदालत ने क्लब के सदस्यों को बताया कि यदि सरकार भूमि वापस लेती है, तो उनकी सदस्यता के अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। जजों ने यह भी स्पष्ट किया कि क्लब के सदस्य इस भूमि के आधिकारिक पट्टेदार नहीं हैं। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया कि जिमखाना क्लब को अपनी गतिविधियों को जारी रखने के लिए वैकल्पिक स्थान प्रदान किया जाएगा।
मामले का सारांश
यह मामला 22 मई को शुरू हुआ था, जब आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने क्लब को एक नोटिस जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि उसे 5 जून तक भूमि सरकार को सौंपनी होगी। सरकार ने पुराने पट्टे के समझौते की धारा 4 का उपयोग किया, जो उसे सार्वजनिक हित के लिए भूमि वापस लेने का अधिकार देती है। केंद्र सरकार के इस आश्वासन से क्लब के सदस्यों को फिलहाल राहत मिली है।