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दिल्ली जिमखाना क्लब भूमि विवाद में केंद्र का हाईकोर्ट में पक्ष

दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ भूमि के विवाद में केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखा है। सरकार का कहना है कि क्लब की स्थायी लीज समाप्त हो चुकी है और एस्टेट ऑफिसर द्वारा जारी नोटिस वैध है। इस मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को होगी। जानें इस विवाद के सभी पहलुओं के बारे में।
 

दिल्ली जिमखाना क्लब का भूमि विवाद


नई दिल्ली: दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ भूमि के संबंध में चल रहे कानूनी विवाद में केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपना पक्ष प्रस्तुत किया है। सरकार का कहना है कि अदालत सार्वजनिक परिसरों से बेदखली की वैधानिक प्रक्रिया को रोक नहीं सकती। उनका तर्क है कि क्लब की स्थायी लीज कानून के अनुसार समाप्त हो चुकी है, और एस्टेट ऑफिसर द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पूरी तरह से वैध है।


यह उत्तर क्लब के सदस्य विजय खुराना द्वारा दायर याचिका पर दिया गया है, जिसमें एस्टेट ऑफिसर की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। केंद्र ने कहा कि Public Premises (Eviction of Unauthorised Occupants) Act के तहत बेदखली से संबंधित मामलों में सिविल अदालतों के अधिकार क्षेत्र पर स्पष्ट रोक है, और इस कानून के तहत एस्टेट ऑफिसर की कार्रवाई पर स्थगन आदेश देने का कोई प्रावधान नहीं है।


अगली सुनवाई की तारीख

कब होगी अगली सुनवाई?


मंगलवार को जस्टिस अवनीश झिंगन की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने विजय खुराना और दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन की याचिकाओं पर अगली सुनवाई के लिए 3 सितंबर की तारीख निर्धारित की। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि केंद्र का जवाब देर से मिला है, इसलिए उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए।


सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने यह भी पूछा कि क्या केंद्र सरकार का पहले दिया गया आश्वासन जारी रहेगा, जिसमें एस्टेट ऑफिसर के समक्ष फिलहाल स्थगन की मांग करने की बात कही गई थी। अदालत ने कहा कि फिलहाल वही व्यवस्था जारी रहेगी।


केंद्र सरकार का बयान

केंद्र सरकार ने अदालत को क्या बताया?


केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि पीपी एक्ट के तहत एस्टेट ऑफिसर और अपीलीय प्राधिकरण की अलग न्यायिक व्यवस्था है। यदि किसी पक्ष को नोटिस पर आपत्ति है, तो उसे उसी प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखनी चाहिए। सरकार ने कहा कि एस्टेट ऑफिसर को नोटिस जारी करने का अधिकार कानून से प्राप्त है और इसे चुनौती नहीं दी जा सकती।


सरकार के अनुसार, 28 फरवरी 1928 की स्थायी लीज को उसकी शर्तों के अनुसार 22 मई 2026 को समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद क्लब का परिसर वैधानिक रूप से अधिकृत नहीं रहा। इसलिए, पीपी एक्ट की धारा 4 के तहत जारी बेदखली की कार्रवाई पूरी तरह कानूनी है और इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए।