दिल्ली नगर निगम में प्रवेश वाही बने नए मेयर, बीजेपी ने दिखाया बहुमत
नई दिल्ली में मेयर का चुनाव
नई दिल्ली: दिल्ली की राजनीतिक परिदृश्य में बुधवार, 29 अप्रैल को एक नया मोड़ आया जब भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रवेश वाही को बिना किसी प्रतिस्पर्धा के दिल्ली नगर निगम का मेयर घोषित किया गया। पीठासीन अधिकारी राजा इकबाल सिंह ने उनकी जीत की औपचारिक घोषणा की। आम आदमी पार्टी के चुनावी दौड़ से बाहर रहने के कारण बीजेपी ने सदन में अपना स्पष्ट बहुमत साबित किया।
मेयर चुनाव में बीजेपी की जीत
मेयर चुनाव के लिए बने इलेक्टोरल कॉलेज में कुल 273 सदस्य शामिल थे, जिनमें पार्षद, विधायक और सांसद शामिल थे। जीत के लिए 137 वोटों की आवश्यकता थी, लेकिन बीजेपी ने अपनी मजबूत स्थिति दिखाते हुए लगभग 156 वोट प्राप्त किए। वहीं, कांग्रेस को केवल 9 वोट मिले। विपक्ष की अनुपस्थिति ने वाही की जीत को और भी आसान बना दिया। यह जीत दिल्ली नगर निगम में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव और संगठन की मजबूती को दर्शाती है।
मेयर ने जताया आभार
पार्टी और नेतृत्व का जताया आभार
जीत के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नवनियुक्त मेयर प्रवेश वाही भावुक नजर आए। उन्होंने अपने संबोधन में केंद्रीय नेतृत्व, दिल्ली इकाई के नेताओं और मुख्यमंत्री का विशेष आभार व्यक्त किया। वाही ने कहा कि उनके जैसे एक साधारण कार्यकर्ता को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देना पार्टी की समावेशी सोच को दर्शाता है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य करेंगे।
प्रवेश वाही का संघर्ष और सफर
साधारण शुरुआत से मेयर तक का सफर
प्रवेश वाही का व्यक्तिगत जीवन संघर्ष और मेहनत की कहानी है। उनका परिवार पाकिस्तान के रावलपिंडी से विस्थापित होकर भारत आया था। खत्री पंजाबी समुदाय से संबंधित वाही की प्रारंभिक शिक्षा पुरानी दिल्ली के एक नगर निगम प्राथमिक स्कूल में हुई। किशोरावस्था से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं। इस गहरे संगठनात्मक जुड़ाव ने उनके राजनीतिक करियर की नींव रखी और उन्हें समाज सेवा के प्रति प्रेरित किया, जिसका फल आज उन्हें मिला है।
राजनीतिक अनुभव
संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक कौशल
वाही का राजनीतिक सफर 1990 में विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्रीय प्रतिनिधि के रूप में शुरू हुआ। इसके बाद 1998 में वे जिला अध्यक्ष बने और 2002 में बीजेपी युवा मोर्चा में शामिल हुए। चुनावी राजनीति में उन्होंने 2007 में रोहिणी से पार्षद के रूप में कदम रखा। उन्होंने दो बार पार्षद के रूप में सेवा दी है और नाहरपुर वार्ड का भी प्रतिनिधित्व किया है। सदन के नेता के रूप में उनके अनुभव ने उन्हें मेयर पद का प्रबल दावेदार बना दिया।