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दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी के धरने को दी अनुमति से इनकार

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित धरना-प्रदर्शन को अनुमति देने से मना कर दिया है। जॉइंट कमिश्नर नूपुर प्रसाद ने बताया कि पार्टी ने बहुत कम समय में सूचना दी थी और पूर्व निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया। इसके अलावा, पुलिस ने यह भी कहा कि पहले की अनुमति के दौरान पार्टी ने कानूनी निर्देशों का पालन नहीं किया था। जानें इस निर्णय के पीछे की पूरी कहानी और पुलिस का क्या कहना है।
 

दिल्ली पुलिस का निर्णय

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित किए जाने वाले धरना-प्रदर्शन को अनुमति देने से मना कर दिया है। जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (नई दिल्ली रेंज) नूपुर प्रसाद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पार्टी ने प्रदर्शन की सूचना बहुत कम समय पहले दी थी और पूर्व निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया था।


नूपुर प्रसाद ने कहा, "हमें कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास से 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए आवेदन प्राप्त हुआ था। यह प्रदर्शन सीईसी की जवाबदेही से संबंधित है। इस सूचना पर विचार करने के बाद पाया गया कि यह बहुत कम समय में दी गई थी। निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार, प्रदर्शन की योजना से 10 दिन पहले सूचना दी जानी चाहिए।"


उन्होंने आगे कहा, "यह भी महत्वपूर्ण है कि जब पहले कॉकरोच जनता पार्टी को प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, तब उन्होंने कानूनी निर्देशों का पालन नहीं किया था। इसलिए, कानूनी निर्देशों का पालन न करने और मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति, सार्वजनिक सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस बार अनुमति नहीं दी गई है।"


पुलिस अधिकारी ने बताया कि नई दिल्ली क्षेत्र में बीएनएसएस की धारा 163 लागू है, जिसके तहत सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए उचित रोकथाम संबंधी पाबंदियां लागू हैं।


उन्होंने कहा कि यदि कोई बीएनएसएस की धारा 163 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


जॉइंट सीपी नूपुर प्रसाद ने कहा कि 7 अक्टूबर को सौरव दास ने एक आवेदन दिया था, जिसमें उन्होंने सीईसी की अकाउंटेबिलिटी को लेकर 10 अक्टूबर को प्रदर्शन करने की बात कही थी। इस प्रोटेस्ट के लिए बहुत कम समय में आवेदन देकर अनुमति मांगी गई, जो हमारी गाइडलाइंस के अनुसार नहीं है। इसलिए, पब्लिक सेफ्टी की गाइडलाइंस को देखते हुए इस प्रोटेस्ट की अनुमति नहीं दी जा रही है।


महिला पुलिस कर्मियों के साथ हुई बदसलूकी के बारे में नूपुर प्रसाद ने कहा कि महिला चाहे वर्दी में हो या सिविल कपड़ों में, उनका सम्मान करना समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है।