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दिल्ली में पीजी इमारत ढहने से छात्रों की मौत पर हाईकोर्ट की सुनवाई

दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पीजी इमारत के ढहने से सात लोगों की जान चली गई, जिनमें पांच छात्र शामिल हैं। इस मामले पर दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है, जिसमें पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने खुद को पक्षकार बनाने का आवेदन दिया है। सरकार ने इस पर आपत्ति जताई है। जानें इस मामले में आगे क्या होगा।
 

दिल्ली में दर्दनाक हादसा


दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में एक पीजी भवन के गिरने से सात लोगों की जान चली गई, जिनमें पांच छात्र भी शामिल हैं। इस घटना पर सुनवाई करते हुए, दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया ने इसे एक गंभीर मामला बताया। अदालत ने कहा कि छोटे शहरों से बेहतर भविष्य की तलाश में आए छात्रों की जान कुछ लोगों की लापरवाही और आपराधिक व्यवहार के कारण चली गई।


किरण बेदी का पक्षकार बनना

पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने इस जनहित याचिका में खुद को पक्षकार बनाने के लिए आवेदन किया है। उच्च न्यायालय ने उनके इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि किरण बेदी एक जागरूक नागरिक हैं और उनके पास व्यापक प्रशासनिक अनुभव है। अदालत का मानना है कि इस महत्वपूर्ण जनहित मामले में उनके अनुभव का सकारात्मक उपयोग किया जा सकता है।


सरकार की आपत्ति

केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और एमसीडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने किरण बेदी को पक्षकार बनाने की याचिका का विरोध किया। सरकार का तर्क है कि बेदी पहले ही इस मामले पर अपनी राय बना चुकी हैं। उच्च न्यायालय ने सरकार को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए तीन दिन का समय दिया है, जिसके बाद आगे की सुनवाई होगी।