दिल्ली में पेयजल संकट का समाधान: नई पाइपलाइन परियोजना
दिल्ली में गर्मियों में पेयजल संकट
हर साल गर्मियों में दिल्ली में पेयजल की समस्या गंभीर हो जाती है। इसका मुख्य कारण हरियाणा से आने वाले पानी में रिसाव और बर्बादी है। इस मुद्दे के समाधान के लिए, दिल्ली सरकार ने लगभग 7,200 करोड़ रुपये की एक महत्वाकांक्षी पाइपलाइन परियोजना की योजना बनाई है। इस योजना के तहत, पुरानी कच्ची नहर के स्थान पर पाइपलाइन बिछाकर पानी को सीधे दिल्ली तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
पुरानी नहर में पानी की बर्बादी
दिल्ली को यमुना के अलावा हरियाणा के मुनक गांव से कैरियर लाइन चैनल (CLC) और दिल्ली सब ब्रांच (DSB) के माध्यम से पानी प्राप्त होता है। DSB एक पुरानी कच्ची नहर है, जिसमें रिसाव, वाष्पीकरण और अवैध निकासी के कारण काफी पानी बर्बाद हो जाता है। अधिकारियों के अनुसार, DSB के माध्यम से आने वाले पानी का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा दिल्ली पहुंचने से पहले ही नष्ट हो जाता है, जबकि पक्की CLC नहर में यह नुकसान केवल 5 प्रतिशत है।
नई पाइपलाइन की क्षमता
समस्या के स्थायी समाधान के लिए, सरकार ने 1,000 क्यूसेक क्षमता वाली नई पाइपलाइन बनाने की योजना बनाई है। इस परियोजना का व्यवहार्यता अध्ययन आईआईटी रुड़की द्वारा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, पाइपलाइन का निर्माण हरियाणा सरकार करेगी, जबकि इसके सभी खर्चों का वहन दिल्ली सरकार करेगी। इससे पानी की बर्बादी में महत्वपूर्ण कमी आने की संभावना है।
जल आपूर्ति प्रणाली की लंबाई
यह जल आपूर्ति प्रणाली हरियाणा के करनाल जिले के मुनक गांव से शुरू होकर हैदरपुर जल उपचार संयंत्र तक पहुंचती है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 102 किलोमीटर है। इसमें से लगभग 17 किलोमीटर हिस्सा दिल्ली की सीमा में आता है। वर्तमान में, CLC के माध्यम से लगभग 600 क्यूसेक और DSB के जरिए लगभग 300 क्यूसेक पानी दिल्ली तक पहुंचता है, लेकिन रिसाव के कारण लगभग 150 क्यूसेक पानी बर्बाद हो जाता है।
दिल्ली और हरियाणा के बीच विवाद
दिल्ली और हरियाणा के बीच मुनक नहर के पानी को लेकर पहले भी विवाद हो चुके हैं। रिसाव रोकने के लिए बनाई गई CLC नहर के निर्माण में दिल्ली सरकार ने हरियाणा को लगभग 500 करोड़ रुपये दिए थे। 2014 में अदालत के निर्देश के बाद, हरियाणा ने इस नहर के माध्यम से दिल्ली को उसका पूरा पानी देना शुरू किया, जिससे द्वारका, बवाना और ओखला के जल शोधन संयंत्रों को लाभ मिला।
जल संकट से राहत की उम्मीद
यदि यह पाइपलाइन परियोजना समय पर पूरी होती है, तो दिल्ली में पानी की बर्बादी में काफी कमी आ सकती है। इससे गर्मियों में राजधानी के लाखों लोगों को बेहतर पेयजल आपूर्ति मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आधुनिक पाइपलाइन प्रणाली न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा देगी, बल्कि भविष्य में बढ़ती जनसंख्या की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।