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दिल्ली में प्रदर्शनों के कारण व्यापार प्रभावित, CTI ने पीएम मोदी से की रोक लगाने की मांग

दिल्ली में लगातार हो रहे प्रदर्शनों ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। CTI ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर नवरात्रि से लेकर दीवाली तक प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग की है। व्यापार में भारी गिरावट आई है, जिससे 15 लाख व्यापारियों का कारोबार संकट में है। यदि समय रहते कोई कदम नहीं उठाया गया, तो व्यापारियों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
 

दिल्ली में व्यापार पर प्रदर्शनों का असर

दिल्ली: राजधानी में लगातार हो रहे बड़े धरना-प्रदर्शनों के कारण सुरक्षा व्यवस्था में आई खामियों ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली जैसे प्रमुख क्षेत्रों में हजारों लोगों के प्रदर्शन के चलते पिछले तीन दिनों में बाजारों की स्थिति गंभीर हो गई है। इस पर ध्यान देते हुए 'चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' (CTI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की अपील की है।


CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने चिंता जताते हुए कहा कि 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि और रामलीलाओं का आरंभ हो रहा है, जिसके बाद दीवाली तक त्योहारी सीजन का महत्वपूर्ण समय होगा। ऐसे में राजधानी के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों पर हो रहे प्रदर्शनों के कारण लगभग 15 लाख व्यापारियों का कारोबार संकट में है।


CTI महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा द्वारा जारी किए गए हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले तीन दिनों में दिल्ली के कुल कारोबार में लगभग 70 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे व्यापार केवल 30 प्रतिशत पर सिमट गया है। संगठन के अनुसार, दिल्ली के बाहर से खरीदारी के लिए आने वाले 2 से 3 लाख लोग घटकर 40 से 50 हजार रह गए हैं। इसके अलावा, स्थानीय ग्राहकों की संख्या में भी 50 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। बार-बार मेट्रो स्टेशन बंद होने और कनॉट प्लेस, संसद मार्ग और जंतर-मंतर के आसपास ट्रैफिक जाम के कारण ग्राहक बाजारों में जाने से कतराने लगे हैं।


CTI की प्रमुख मांगें पीएम मोदी को भेजी गईं



  • त्योहारी सीजन में प्रतिबंध: नवरात्रि से लेकर दीपावली तक दिल्ली के मुख्य बाजारों, जंतर-मंतर, संसद मार्ग और लुटियंस जोन में 1000 से अधिक लोगों के धरने-प्रदर्शनों पर पूर्ण रोक लगाई जाए, ताकि त्योहारी और शादी-ब्याह का सीजन प्रभावित न हो।

  • संख्या सीमा तय हो: भविष्य के लिए नियम बनाए जाएं कि जंतर-मंतर और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में एक साथ एक हजार से अधिक लोगों को विरोध प्रदर्शन की अनुमति न मिले।

  • वैकल्पिक स्थायी प्रोटेस्ट जोन: बाहरी दिल्ली के बुराड़ी या रामलीला मैदान जैसी जगहों पर एक स्थायी 'प्रोटेस्ट जोन' निर्धारित किया जाए, ताकि आम जनता, यातायात और व्यापारियों को परेशानी का सामना न करना पड़े।


व्यापारिक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करते हैं, लेकिन त्योहारी सीजन के पीक समय पर राजधानी के बीचों-बीच अनिश्चितकालीन और बड़े जमावड़े अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यदि सरकार ने समय रहते इस पर ठोस दिशा-निर्देश नहीं दिए, तो दिल्ली के व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।