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दिल्ली में प्रदूषण और ठंड का संकट: स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव

दिल्ली में नए साल के दूसरे सप्ताह में प्रदूषण और ठंड ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, कई क्षेत्रों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। जानें किन इलाकों में प्रदूषण सबसे अधिक है और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह क्या है।
 

दिल्ली की बिगड़ती हवा की गुणवत्ता

नई दिल्ली: नए साल के दूसरे सप्ताह में, दिल्ली की राजधानी दमघोंटू हवा और कड़ाके की ठंड का सामना कर रही है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और DPCC द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, शहर के अधिकांश क्षेत्रों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच चुका है। स्मॉग की मोटी परत और ठंडी हवाओं की कमी ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।


प्रदूषण के सबसे प्रभावित क्षेत्र

आज सुबह 6 बजे के आंकड़ों के अनुसार, नेहरू नगर (AQI 346) और पूसा (AQI 345) सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्र रहे। इसके बाद मुंडका (AQI 339), चांदनी चौक (AQI 335) और डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज (AQI 331) का स्थान रहा। इन क्षेत्रों में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर के बेहद करीब पहुंच गई है, जिससे स्वस्थ व्यक्तियों को भी आंखों में जलन और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।


दिल्ली में AQI की स्थिति

दिल्ली के कई हिस्से 'बहुत खराब' और 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। आनंद विहार, जहांगीरपुरी, द्वारका सेक्टर-8 और आरके पुरम में AQI 320 से ऊपर रहा। अशोक विहार, बवाना, पंजाबी बाग और वजीरपुर जैसे क्षेत्रों में AQI 300 से 320 के बीच दर्ज किया गया। वहीं IGI एयरपोर्ट, आया नगर और लोधी रोड में स्थिति अपेक्षाकृत खराब श्रेणी में रही।


AQI की क्षेत्रवार स्थिति

CPCB और DPCC के अनुसार, आनंद विहार (AQI 328), जहांगीरपुरी (AQI 326), ओखला फेज-2 (AQI 326), सिरीफोर्ट (AQI 330), पूसा (AQI 345), नेहरू नगर (AQI 346), मुंडका (AQI 339) और रोहिणी (AQI 306) जैसे इलाके प्रदूषण की चपेट में हैं। अलीपुर, बुराड़ी, नजफगढ़ और नॉर्थ कैंपस जैसे क्षेत्रों में भी AQI 250 से ऊपर दर्ज किया गया है, जो स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता।


प्रदूषण में वृद्धि के कारण

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, शीतलहर और हवा की गति में कमी के कारण प्रदूषक कण वातावरण में फंस गए हैं। ठंड के कारण PM2.5 और PM10 जैसे कण जमीन के पास ही जमा हो रहे हैं। उत्तर-पश्चिमी हवाओं की कमजोरी के कारण धूल और धुएं का फैलाव नहीं हो पा रहा है, जिससे स्मॉग की मोटी परत बन गई है और हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह

डॉक्टरों ने बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी से ग्रस्त लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। सुबह के समय बाहर निकलने से बचने और आवश्यकता पड़ने पर N-95 मास्क पहनने की सिफारिश की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोग निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें और खुले में कचरा जलाने से बचें, ताकि प्रदूषण और न बढ़े।