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दिल्ली में मौसम का मिजाज और प्रदूषण की स्थिति

दिल्ली में हाल के दिनों में मौसम में बदलाव और प्रदूषण की स्थिति पर ध्यान दिया जा रहा है। दशहरा के बाद, कई क्षेत्रों में कोहरा और प्रदूषण बढ़ गया है। AQI स्तर में वृद्धि ने लोगों की सांस लेने में कठिनाई पैदा की है। दिल्ली सरकार 1 नवंबर से प्रदूषण नियंत्रण के लिए नए नियम लागू करने की योजना बना रही है। जानें इस विषय में और क्या जानकारी है।
 

दिल्ली में मौसम में बदलाव


नई दिल्ली: हाल के दिनों में मौसम में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। दशहरा समाप्त हो चुका है और देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम का स्वरूप बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। आज सुबह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कई क्षेत्रों में हल्का कोहरा छाया रहा। अक्षरधाम के पास CWG अपार्टमेंट्स के निकट बायोडायवर्सिटी पार्क में घना कोहरा देखा गया।


मंगलवार को दिल्ली के सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 17.1 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 31.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बुधवार को अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है। वर्तमान में दिल्ली का मौसम शुष्क है और 25 अक्टूबर तक बारिश की कोई संभावना नहीं है। हालांकि, 24 और 25 अक्टूबर को आसमान में कुछ समय के लिए बादल छा सकते हैं।


दिल्ली में प्रदूषण की बढ़ती समस्या

दिल्ली के कई इलाकों में बढ़ा प्रदूषण:


मंगलवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 179 दर्ज किया गया, जो मध्यम श्रेणी में आता है। लेकिन बुधवार सुबह तक कई क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ गई। आधी रात को बवाना में AQI 273, द्वारका सेक्टर-8 में 262, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी में 248 और डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में 230 दर्ज किया गया। AQI का 201 से 300 के बीच होना खराब श्रेणी में माना जाता है, जिससे लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो सकती है, विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों को।


दशहरा और पराली जलाने से बढ़ी चिंता

दशहरा और पराली जलाने से बढ़ी चिंता:


मंगलवार को दिल्ली में दशहरा मनाया गया, जिसमें कई स्थानों पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए गए और आतिशबाजी की गई। पटाखों से निकलने वाले धुएं में छोटे प्रदूषक कण होते हैं, जो वायु की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि मौजूदा प्रदूषण में दशहरा समारोहों का कितना योगदान रहा।


इसके अलावा, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना भी चिंता का विषय है। किसान अगली फसल की तैयारी के लिए खेतों में पराली जलाते हैं, जिससे निकलने वाला धुआं दिल्ली तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही, वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़कों की धूल और कारखानों से निकलने वाली गैसें भी प्रदूषण को बढ़ाती हैं।


विंटर एक्शन प्लान का कार्यान्वयन

1 नवंबर से लागू होगा विंटर एक्शन प्लान:


दिल्ली सरकार 1 नवंबर से विंटर एक्शन प्लान लागू करने की योजना बना रही है। इसके अंतर्गत प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों, निर्माण कार्यों और सड़कों की धूल पर नियंत्रण के लिए कदम उठाए जाएंगे। नए नियमों के तहत जिन वाहनों के पास वैध PUC सर्टिफिकेट नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा। दिल्ली के बाहर की कुछ गाड़ियों की एंट्री पर भी रोक लगेगी। इसके अलावा, निर्माण कार्यों पर निगरानी रखी जाएगी और मशीनों से सड़कों की सफाई की जाएगी। फिलहाल, दिल्ली में 23 अक्टूबर तक हवा खराब रहने का अनुमान है।