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दिल्ली में रात के यात्रियों को लूटने वाला बस गिरोह पकड़ा गया

दिल्ली में एक निजी बस सेवा द्वारा रात के यात्रियों को लूटने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो यात्रियों को सस्ते किराए का लालच देकर लूटते थे। यह गिरोह आनंद विहार से यात्रियों को लेकर निकलता था और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर लूट की वारदात को अंजाम देता था। जानें इस संगठित अपराध के बारे में और क्या जानकारी मिली है।
 

दिल्ली में लूट का नया तरीका


नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर की ठंडी रातों में यात्रियों को सस्ते किराए का लालच देकर लूटने वाली एक निजी बस सेवा अब पुलिस के ध्यान में आ गई है। यह बस पिछले दो महीनों से आनंद विहार रेलवे स्टेशन, ISBT और आस-पास के क्षेत्रों में सक्रिय थी। गिरोह रात और सुबह के समय बस चलाकर पुलिस की कम तैनाती का फायदा उठाता था।


गुप्त सूचना और बढ़ती शिकायतों के आधार पर मध्य और उत्तरी दिल्ली पुलिस ने जांच को तेज किया। पुलिस ने राजघाट रेड लाइट के पास बस को रोका और यात्रियों को धमकाते हुए तीन आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया। यह मामला संगठित अपराध के एक नए और चौंकाने वाले तरीके को उजागर करता है।


डकैती की योजना और संचालन

पुलिस की जांच में यह सामने आया कि तीनों आरोपियों ने सामूहिक लूट के लिए 23 सीटों वाली बस खरीदी थी, जिसका उपयोग केवल अपराध के लिए किया जा रहा था। यात्रियों को बीच सफर में धमकाकर, उन पर हमला कर सामान और पैसे लूटे जाते थे। यह पूरी योजना बेहद संगठित थी।


किराए का लालच और डर का माहौल

गिरोह आनंद विहार से यात्रियों को केवल 30 रुपये में मध्य और उत्तरी दिल्ली छोड़ने का लालच देता था। बस में बैठते ही यात्रियों को यह एहसास नहीं होता कि वे एक जाल में फंस चुके हैं। चलती बस में मारपीट और लूट आम बात थी, और डर का माहौल बनाकर विरोध को दबा दिया जाता था।


एक्सप्रेसवे पर लूट की योजना

बस जानबूझकर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से निकाली जाती थी, जहां भीड़ कम और सड़क लंबी होती है। इसी रूट पर यात्रियों को पीटा और लूटा जाता था। लूट के बाद यात्रियों को अंधेरे इलाकों में छोड़ दिया जाता था, ताकि वे तुरंत मदद न ले सकें।


गैंग के सदस्यों की भूमिकाएँ

योगेश बस चालक के रूप में गिरोह का नेतृत्व कर रहा था, जबकि अरशद कंडक्टर और प्रेम शंकर सहायक की भूमिका में थे। दोनों यात्रियों पर नजर रखते और लूट के दौरान हमला करते थे। दिन में भी 2-3 चक्कर लगाकर वे अपने शिकार का चयन करते थे।


पुलिस ने बताया कि आरोपी बस में सवार सभी लोगों को लूटने के बाद पीड़ितों को अनजान जगहों पर छोड़ देते थे। गिरोह दिन में दो से तीन चक्कर लगाता था। पुलिस के अनुसार, 23 लोगों की बैठने की क्षमता वाली इस बस के किराए से लगभग 90,000 रुपये वसूल किए गए।


इसके अलावा, आरोपियों ने प्रतिदिन यात्रियों से 1,000 से 2,000 रुपये लूटे। अधिकारियों का कहना है कि पिछले दो महीनों में उनकी कमाई 1 लाख रुपये से अधिक हो गई। शुरू में वे बस में बचे एक या दो यात्रियों को निशाना बनाते थे, लेकिन बाद में सभी यात्रियों को लूटने लगे।


सरगना के खिलाफ पहले से मामले

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, योगेश पर पूर्वी और पश्चिमी दिल्ली में मारपीट, डकैती और शस्त्र अधिनियम के तहत कम से कम 3 मामले पहले से दर्ज हैं। अब वह यात्रियों को लूटने वाली बस गैंग का मुख्य आरोपी बनकर गिरफ्तार हुआ है। पुलिस नेटवर्क की जांच जारी है।