द्वितीय सरायघाट रेल-कम-रोड पुल परियोजना से पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी में सुधार
परियोजना का महत्व
मालीगांव- पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने द्वितीय सरायघाट रेल-कम-रोड पुल परियोजना पर कार्य शुरू किया है, जिसमें आगियाठरी और कामाख्या स्टेशनों के बीच रेल पटरी का दोहरीकरण शामिल है। यह परियोजना असम के परिवहन अवसंरचना को महत्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ करेगी। यह ब्रह्मपुत्र नदी पर रेल और सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी, गुवाहाटी के लिए परिवहन क्षमता में वृद्धि करेगी और पूर्वोत्तर क्षेत्र की व्यापक कनेक्टिविटी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होगी। मौजूदा सरायघाट पुल का निर्माण सितंबर 1962 में हुआ था और यह छह दशकों से अधिक समय से यात्रियों और माल परिवहन के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य कर रहा है।
परियोजना की योजना और निष्पादन
आगियाठरी और कामाख्या स्टेशनों के बीच 7.20 किलोमीटर के दोहरीकरण लाइन परियोजना को 2024 में रेल मंत्रालय द्वारा मंजूरी दी गई थी। इसके बाद विस्तृत योजना और निविदा प्रक्रिया शुरू हुई। इस परियोजना का कार्यभार लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) को सौंपा गया है, जो बड़े अवसंरचना परियोजनाओं में विशेषज्ञता रखती है। नए पुल के निर्माण में भूमि अधिग्रहण, अतिक्रमण हटाने और मौजूदा यूटिलिटीज़ को स्थानांतरित करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, लेकिन राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से अधिकांश समस्याओं का समाधान किया गया है।
डबल-डेकर पुल की विशेषताएँ
इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ब्रह्मपुत्र नदी पर प्रस्तावित 1.3 किलोमीटर लंबा डबल-डेकर पुल है। निचले डेक पर दो रेल लाइनें होंगी, जबकि ऊपरी डेक पर तीन-लेन वाली सड़क और एक फुटपाथ होगा। मौजूदा सरायघाट पुल की तुलना में यह संरचना अधिक सक्षम होगी। मुख्य पुल का निर्माण वेल फाउंडेशन पर किया जाएगा, जिसमें वेल्डेड ओपन वेब गर्डर (ओडब्ल्यूजी) सुपरस्ट्रक्चर होगा।
आधुनिक निर्माण तकनीक का उपयोग
इस परियोजना में आधुनिक निर्माण तकनीक, डिजिटल इंजीनियरिंग, गुणवत्ता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ब्रह्मपुत्र नदी की कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्माण विधियों को निर्धारित किया जा रहा है।
भविष्य की योजनाएँ
द्वितीय सरायघाट रेल-कम-रोड पुल न केवल आगियाठरी-कामाख्या रेलवे सेक्शन के दोहरीकरण के लिए आवश्यक है, बल्कि यह गुवाहाटी और पूर्वोत्तर के परिवहन तंत्र को भी सहयोग करेगा। परियोजना का कार्य अब निष्पादन चरण में प्रवेश कर चुका है, और पाइलिंग का कार्य अक्टूबर 2026 से शुरू करने का लक्ष्य है।