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धनतेरस पर पत्नी के नाम सोना खरीदने के टैक्स नियम

धनतेरस पर पत्नी के नाम से सोना खरीदने की परंपरा भारत में प्रचलित है, लेकिन इसके साथ कुछ टैक्स नियम भी जुड़े होते हैं। जानें कि पति की कमाई से खरीदे गए सोने पर टैक्स कैसे लागू होता है, गिफ्ट टैक्स के नियम क्या हैं, और सोना बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स की गणना कैसे की जाती है। इस लेख में आपको इन सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी मिलेगी, जो आपको सही निर्णय लेने में मदद करेगी।
 

धनतेरस पर सोना खरीदने की परंपरा

भारत में धनतेरस के अवसर पर पत्नी के नाम से सोना खरीदना एक सामान्य प्रथा है। कई पति अपनी कमाई से सोने के गहने, सिक्के या गोल्ड बार खरीदते हैं, लेकिन यह खरीदारी पत्नी के नाम पर की जाती है। इस प्रक्रिया से तुरंत कोई आयकर नहीं लगता, लेकिन भविष्य में सोने की बिक्री पर टैक्स की जिम्मेदारी उत्पन्न हो सकती है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि सोना खरीदने के लिए पैसे किसने दिए हैं।


पति की कमाई से खरीदे सोने पर टैक्स का निर्धारण

पति की कमाई से खरीदे सोने पर किसे देना होगा टैक्स?

यदि पति अपनी कमाई से पत्नी के नाम पर सोना खरीदता है या उसे पैसे उपहार में देकर सोना खरीदने के लिए देता है, तो आयकर के क्लबिंग नियम लागू हो सकते हैं। इसका अर्थ है कि सोने की बिक्री से होने वाला लाभ पत्नी की आय में नहीं, बल्कि पति की आय में जोड़ा जा सकता है।

चार्टर्ड अकाउंटेंट रिचा कुमारी के अनुसार, आयकर अधिनियम 2025 की धारा 99 के तहत बिना उचित भुगतान के जीवनसाथी को दी गई संपत्ति से होने वाली आय पति की आय में जोड़ी जा सकती है।

ClearTax की टैक्स विशेषज्ञ चांदनी आनंद बताती हैं कि यदि पत्नी ऐसे सोने को बेचकर लाभ कमाती है, तो क्लबिंग के प्रावधान लागू होंगे। हालांकि, यदि पत्नी अपनी कमाई या पति से मिलने वाले व्यक्तिगत खर्च के भत्ते से सोना खरीदती है, तो यह नियम लागू नहीं होगा।


गिफ्ट टैक्स के नियम

पत्नी को पति से मिले पैसों पर गिफ्ट टैक्स लगेगा?

आयकर कानून के अनुसार, पति-पत्नी एक-दूसरे के रिश्तेदार माने जाते हैं। इसलिए पति द्वारा पत्नी को दिया गया पैसा गिफ्ट के रूप में टैक्स मुक्त होता है। इस पर कोई मौद्रिक सीमा नहीं होती।

हालांकि, गिफ्ट टैक्स फ्री होने का मतलब यह नहीं है कि उससे खरीदे गए सोने को बेचने पर होने वाला लाभ भी पत्नी के लिए टैक्स फ्री होगा। यदि पत्नी ने पति से मिले पैसों से सोना खरीदा है, तो उसे बेचने पर होने वाला कैपिटल गेन पति की आय में जोड़ा जा सकता है।


कैपिटल गेन टैक्स की गणना

सोना बेचने पर कितना देना होगा कैपिटल गेन टैक्स?

सोना बेचने पर लगने वाला टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि उसे कितने समय तक रखा गया था। यदि सोने के गहने, सिक्के या गोल्ड बार 24 महीने या उससे कम समय तक रखे गए हैं, तो इसे शॉर्ट टर्म कैपिटल एसेट माना जाएगा। इससे होने वाले लाभ पर संबंधित व्यक्ति की आयकर स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा।

यदि सोना 24 महीने से अधिक समय तक रखा गया है, तो इसे लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट माना जाएगा। ऐसे में लाभ पर 12.5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगेगा। इसमें इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलेगा।

कैपिटल गेन की गणना करते समय सोने को बेचने से मिली रकम में से उसकी मूल खरीद कीमत और बिक्री से जुड़े योग्य खर्च घटाए जाते हैं। इसके बाद बची रकम पर टैक्स की गणना होती है।


आयकर विभाग से बचने के उपाय

इनकम टैक्स विभाग के सवालों से बचने के लिए रखें ये दस्तावेज

पत्नी के नाम पर सोना खरीदना अपने आप में आयकर नियमों का उल्लंघन नहीं है। हालांकि, यदि पत्नी की घोषित आय की तुलना में सोने की खरीदारी बहुत अधिक है, तो आयकर विभाग पैसों के स्रोत के बारे में सवाल पूछ सकता है।

रिचा कुमारी के अनुसार, ऐसी स्थिति से बचने के लिए पति-पत्नी को सोने की खरीद के बिल, भुगतान की रसीद, बैंक स्टेटमेंट और पैसे गिफ्ट करने से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखने चाहिए।

उन्होंने बताया कि आयकर अधिनियम 2025 की धारा 103 और 104 में अघोषित निवेश और संपत्ति से जुड़े प्रावधान हैं। यदि पत्नी सोना खरीदने में इस्तेमाल किए गए पैसों का संतोषजनक स्रोत नहीं बता पाती है, तो उस निवेश को अघोषित निवेश माना जा सकता है।

चांदनी आनंद ने भी पति से पत्नी के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर होने का रिकॉर्ड रखने की सलाह दी है। इसके साथ खरीदारी के बिल और जरूरत पड़ने पर वैल्यूएशन सर्टिफिकेट भी संभालकर रखना चाहिए।