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नई तकनीक से प्रदूषण नियंत्रण में मददगार कदम

नई दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक नई तकनीक आधारित प्रणाली लागू की जा रही है। एक अक्टूबर से 'नो पीयूसीसी, नो फ्यूल' नियम प्रभावी होगा, जिसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के बिना वाहन चालकों को ईंधन नहीं मिलेगा। इस प्रणाली में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे का उपयोग किया जाएगा, जिससे प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान आसान होगी। विशेषज्ञों का सुझाव है कि वाहन मालिकों को समय पर अपना पीयूसीसी बनवाना चाहिए।
 

नई दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए नई पहल


नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एक नई तकनीक आधारित प्रणाली लागू की जा रही है। एक अक्टूबर से 'नो पीयूसीसी, नो फ्यूल' नियम लागू होगा, जिसके तहत यदि वाहन के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं है, तो उसे पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा।


पहले चरण में 775 पेट्रोल पंपों का हाईटेक होना

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के अनुसार, एनसीआर के पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जा रहे हैं। पहले चरण में गुरुग्राम, फरीदाबाद, झज्जर और सोनीपत के 775 पेट्रोल पंप इस तकनीक से जुड़े जाएंगे। इनमें से 500 से अधिक पंपों पर कैमरे लगाने का कार्य गुरुग्राम में किया जाएगा, जबकि 300 पंपों पर यह कार्य 31 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद सितंबर में एनसीआर के अन्य 2005 पेट्रोल पंपों को भी इस प्रणाली में शामिल किया जाएगा।


नई निगरानी प्रणाली का कार्यप्रणाली

जब कोई वाहन पेट्रोल पंप पर पहुंचेगा, तो एएनपीआर कैमरा उसकी नंबर प्लेट को स्कैन करेगा। इसके बाद, सिस्टम वाहन के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) की वैधता को ऑनलाइन जांचेगा। यदि प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका है या उपलब्ध नहीं है, तो वाहन को पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह से स्वचालित होगी, जिसमें किसी मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होगी।


प्रदूषण नियंत्रण पर विशेष ध्यान

सीएक्यूएम का मानना है कि इस प्रणाली से बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहनों की पहचान करना आसान होगा, जिससे प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या में कमी आएगी। अधिकारियों के अनुसार, अगस्त और सितंबर में कैमरे लगाने का कार्य चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। आरटीए सचिव संजीव सिंगला ने बताया कि गुरुग्राम में इस व्यवस्था को समय पर लागू करने के लिए तैयारियां तेजी से चल रही हैं।


वाहन चालकों के लिए आवश्यक कदम

विशेषज्ञों का सुझाव है कि वाहन मालिकों को अपना पीयूसीसी समय पर बनवाना चाहिए, ताकि एक अक्टूबर के बाद किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। नई व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को दंडित करना नहीं, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना है। यह स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।