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नई दिल्ली में संपन्न हुआ BRICS समिट 2026, विपक्ष की अनुपस्थिति पर उठे सवाल

नई दिल्ली में आयोजित BRICS समिट 2026 का समापन हो गया है, जिसमें भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया, जबकि विपक्षी दलों के कई नेता अनुपस्थित रहे। कांग्रेस ने समिट के परिणामों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपेक्षाएं पूरी नहीं हुईं। जानें इस समिट में चर्चा किए गए मुद्दे और राजनीतिक बहस के प्रभाव के बारे में।
 

BRICS समिट का समापन


नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय BRICS समिट 2026 का समापन हो गया है। इस बैठक में BRICS देशों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, लेकिन विपक्षी दलों द्वारा शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री इसमें शामिल नहीं हुए। दूसरी ओर, भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री भारत मंडपम में उपस्थित रहे और रात्रिभोज में भाग लिया।


भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए

BRICS से संबंधित इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जैसे कई नेता शामिल हुए। इन नेताओं ने भारत मंडपम में आयोजित रात्रिभोज में भी भाग लिया।


विपक्षी नेताओं की अनुपस्थिति

हालांकि, विपक्षी दलों से जुड़े कई मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में नहीं दिखे। उनके अनुपस्थित रहने की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है। तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और सुखविंदर सिंह सुक्खू पहले से निर्धारित कार्यक्रमों में व्यस्त थे।


विपक्ष की बैठक से दूरी

विपक्षी दलों का बड़े सरकारी कार्यक्रमों से दूरी बनाना कोई नई बात नहीं है। जुलाई 2024 में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में भी कई विपक्षी मुख्यमंत्रियों ने भाग नहीं लिया था। उस समय कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के कुछ नेताओं ने केंद्रीय बजट को गैर-NDA शासित राज्यों के लिए भेदभावपूर्ण बताते हुए बैठक का बहिष्कार किया था। इसी तरह, 2023 में नई दिल्ली में आयोजित G20 डिनर में भी कांग्रेस शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए थे।


कांग्रेस ने उठाए सवाल

BRICS समिट के समापन के बाद, कांग्रेस ने बैठक के परिणामों और नई दिल्ली घोषणा पर सवाल उठाए। कांग्रेस का कहना है कि शिखर सम्मेलन से जो उम्मीदें थीं, उनके मुकाबले उपलब्धियां कम रहीं। पार्टी ने यह भी दावा किया कि घोषणापत्र में अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख और पहलगाम आतंकी हमले जैसे मुद्दों का पर्याप्त उल्लेख नहीं किया गया। कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा कि भारत को चीन के साथ सीमा से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए था।


पहलगाम हमले पर सवाल

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी BRICS घोषणा-पत्र में आतंकवाद के मुद्दे पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि आतंकवाद की निंदा की गई है, लेकिन पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार लोगों या संगठनों का स्पष्ट नाम नहीं दिया गया।


BRICS समिट में घरेलू राजनीति का प्रभाव

इस बार BRICS समिट 2026 में अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ घरेलू राजनीति भी चर्चा का विषय बनी। एक ओर, भारत ने BRICS की अध्यक्षता के दौरान वैश्विक सहयोग, व्यापार, सुरक्षा और विकास पर जोर दिया, वहीं विपक्षी नेताओं की अनुपस्थिति और कांग्रेस की आलोचना ने राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया।