नालंदा में शीतला माई मंदिर में भगदड़: 8 श्रद्धालुओं की मौत
नालंदा में शीतला माई मंदिर में भीड़ का हादसा
नालंदा: नालंदा जिले के मघड़ा गांव में स्थित शीतला माई मंदिर में चैत्र महीने के अंतिम मंगलवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस दुखद घटना में 8 लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
हर साल चैत्र माह में बड़ी संख्या में भक्त इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। यह मंदिर अपने प्राचीन इतिहास और धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि यहां देवी शीतला की पूजा करने से चेचक जैसे रोगों से सुरक्षा मिलती है। देवी को साफ-सफाई और बच्चों की सुरक्षा की देवी माना जाता है।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
मंदिर का इतिहास
मघड़ा गांव का नाम एक प्राचीन कथा से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि राजा वृषकेतु को एक सपना आया था, जिसके बाद खुदाई में देवी की प्रतिमा मिली और वहीं से जलधारा फूट पड़ी। इसी कारण इस स्थान को 'मिट्ठी कुआं' कहा जाता है और गांव का नाम मघड़ा पड़ा।
मान्यताएँ और परंपराएँ
मंदिर परिसर में नीम और पीपल के कई पेड़ हैं। मान्यता है कि इन पेड़ों की छांव में बैठने से त्वचा संबंधी रोगों में राहत मिलती है। प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपने भारत यात्रा के दौरान इस स्थान का उल्लेख किया है।
मंदिर के गर्भगृह में काले पत्थर की देवी की प्रतिमा स्थापित है, जो लगभग 12 से 15 इंच लंबी है। इस प्रतिमा में देवी के चार हाथ हैं, जिनमें कलश, पुस्तक, झाड़ू और नीम की डाली दिखाई गई है। यह स्वरूप शीतला माता की पहचान है।
चैत्र माह का विशेष महत्व
चैत्र माह में विशेष आयोजन
चैत्र माह में यहां विशेष मेला आयोजित होता है और मंगलवार को 'मंगला धार' चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है। रामनवमी और नवरात्र के दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं।
इस बार भीड़ का दबाव अचानक बढ़ गया, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई और भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। स्थानीय लोगों और पुलिस की सहायता से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया।