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नीट परीक्षा रद्द होने से छात्रों में बढ़ी चिंता, सरकार की मुश्किलें बढ़ीं

नीट परीक्षा के रद्द होने और 12वीं बोर्ड परीक्षा में गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों को परेशान कर दिया है। यह मुद्दा भाजपा सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है, खासकर जब युवा वर्ग की चिंताएं बढ़ रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी और राहुल गांधी का सक्रियता इस स्थिति को और जटिल बना रही है। जानें इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया और छात्रों की समस्याओं का समाधान कैसे किया जा रहा है।
 

छात्रों की समस्याएं और सरकार की चिंता


नीट परीक्षा के रद्द होने और 12वीं बोर्ड परीक्षा में ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) की व्यवस्था ने लाखों छात्रों को परेशान कर दिया है। यह मुद्दा भाजपा सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है, खासकर जब यह युवा वर्ग से जुड़ा है। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता इस स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।


पहले इस युवा समूह को सरकार के कार्यों से कोई खास मतलब नहीं था, लेकिन अब जब उनकी समस्याएं बढ़ गई हैं, तो यह सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर उम्मीद जताई जा रही थी कि वे इस मुद्दे पर कुछ कहेंगे, लेकिन उन्होंने छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज करते हुए अन्य विषयों पर बात की।


राहुल गांधी ने प्रभावित छात्रों से मिलकर उनकी समस्याओं पर चर्चा की, जबकि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि नीट यूजी की परीक्षा 21 जून को दोबारा होगी और इसकी निगरानी प्रधानमंत्री करेंगे।


हालांकि, प्रधानमंत्री ने इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं की। यदि वे खुद छात्रों को भरोसा दिलाते, तो शायद उनकी चिंताओं को कम किया जा सकता था।


सरकार की चिंता इस बात की है कि नैरेटिव पर नियंत्रण कमजोर हो रहा है और समर्थकों का एक बड़ा समूह सरकार के खिलाफ हो रहा है। इसलिए, डैमेज कंट्रोल के तहत प्रयास किए जा रहे हैं।


शिक्षा मंत्री ने रक्षा मंत्री से मुलाकात की और तय किया गया कि 21 जून को नीट परीक्षा में वायु सेना के विमानों से प्रश्न पत्र पहुंचाए जाएंगे। यह कदम सरकार की परीक्षा आयोजित करने में नाकामी को स्वीकार करने जैसा है।


सुप्रीम कोर्ट ने इस पर तंज करते हुए कहा कि परीक्षा कराने वालों को शर्म आनी चाहिए। लेकिन शिक्षा मंत्रालय को इस बात की कोई चिंता नहीं है।


सरकार को यह समझना होगा कि समस्या संरचनात्मक है और इसे दूर करने के लिए ठोस उपायों की आवश्यकता है।