नीलेकणी कमेटी: परीक्षा प्रणाली में सुधार की नई दिशा
परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नई कमेटी का गठन
भारत सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नंदन नीलेकणी, जो कि इंफोसिस के सह-संस्थापक हैं, को जिम्मेदारी सौंपी है। इस उच्चाधिकार प्राप्त समिति में पूर्व इसरो प्रमुख एस सोमनाथ भी शामिल हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि दो साल पहले के राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी, जिसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में सुधार करना था। हाल ही में नीट यूजी पेपर लीक के बाद यह नई समिति गठित की गई है। राधाकृष्णन समिति ने 100 से अधिक सिफारिशें की थीं, जिनमें से 27 पर ध्यान नहीं दिया गया।
राधाकृष्णन समिति ने सुझाव दिया था कि एनटीए में विषय विशेषज्ञों को शामिल किया जाए, लेकिन इसके बावजूद पेपर लीक की घटनाएं जारी हैं। यह दर्शाता है कि समस्या केवल विशेषज्ञों की कमी नहीं है, बल्कि यह संरचनात्मक और व्यवस्थागत है। नीलेकणी को इन समस्याओं को समझकर समाधान प्रस्तुत करना होगा।
उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या वे अखिल भारतीय परीक्षा प्रणाली को समाप्त करने की सिफारिश करेंगे। क्या वे यह सुझाव देंगे कि नीट यूजी की परीक्षा को राज्यों को अपने कॉलेजों में दाखिले का अधिकार दिया जाए? यदि नीलेकणी की समिति नीट को समाप्त करने की सिफारिश नहीं करती है, तो उनके सुझावों का प्रभाव सीमित रह जाएगा।
यदि नीलेकणी समिति नीट जैसी परीक्षाओं को समाप्त करने की सिफारिश नहीं करती है, तो उनके पास क्या विकल्प बचेगा? सबसे अच्छा विकल्प नीट को समाप्त करना होगा। लेकिन यदि सरकार पहले से ही यह तय कर चुकी है कि नीट जारी रहेगा, तो नीलेकणी को सुझाव देना चाहिए कि इसे दो चरणों में आयोजित किया जाए। अगले साल नीट की परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी, जिससे पेपर लीक की संभावना कम हो सकती है।
इसके अलावा, नीलेकणी को मेडिकल शिक्षा की फीस को नियमित करने के सुझाव देने चाहिए। वर्तमान में, मेडिकल परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक होने का मुख्य कारण यह है कि एक बार में परीक्षा होती है। यदि फीस को नियंत्रित किया जाए, तो पेपर लीक की घटनाएं कम हो सकती हैं।
नीलेकणी को केवल नीट पर नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को सुधारने के सुझाव देने होंगे। एनटीए को खत्म करने और पुरानी परीक्षा व्यवस्था को बहाल करने की सिफारिश की जानी चाहिए। यदि एनटीए को समाप्त करना संभव नहीं है, तो सुधार की दिशा में कदम उठाने होंगे।
एनटीए को वैधानिक दर्जा देने की आवश्यकता है, ताकि इसकी परीक्षाएं विश्वसनीय बन सकें। इसके अलावा, ठेके पर नियुक्तियों पर रोक लगानी चाहिए और परीक्षा से जुड़े कार्यों को आउटसोर्स करने पर रोक लगानी चाहिए।