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नेपाल में बाढ़ के बाद शव पहचान में दो परिवारों का विवाद

नेपाल के रासुवा में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद एक शव को लेकर दो परिवारों के बीच विवाद खड़ा हो गया है। दोनों परिवारों ने शव को अपने परिजन का बताया है, जिसके लिए प्रशासन ने डीएनए जांच का सहारा लिया है। गोपाल दहित और दामोदर बसयाल के परिवारों के बीच इस मामले में पहचान को लेकर जटिलताएँ उत्पन्न हो गई हैं। पुलिस ने अब तक कई परिवारों के डीएनए नमूने लिए हैं ताकि सही पहचान की जा सके। यह मामला न केवल स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती है, बल्कि यह मानवता के लिए भी एक गंभीर मुद्दा है।
 

शव पहचान में कठिनाई


नेपाल के रासुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद, दो परिवारों ने एक ही शव को अपने परिजन के रूप में पहचानने का दावा किया है। प्रशासन ने इस मामले की पुष्टि के लिए डीएनए परीक्षण का सहारा लिया है।


बाढ़ के कारण शवों की पहचान करना और उन्हें लापता व्यक्तियों की सूची से मिलाना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। पोखरा स्वास्थ्य विज्ञान अकादमी में एक शव संख्या 1003 पर दो परिवारों ने दावा किया। एक परिवार का कहना है कि यह गोपाल दहित का शव है, जो मैलुंग जलशक्ति परियोजना में कार्यरत थे, जबकि दूसरे का दावा है कि यह दामोदर बसयाल का शव है, जो रुपनदेही के एक पर्यटन गाइड हैं।


दोनों परिवारों का कहना है कि शव का शारीरिक विवरण उनके रिश्तेदार से मेल खाता है। इसलिए, पुलिस ने दहित, बसयाल और शव के डीएनए नमूनों को जांच के लिए भेजा है। शव की पहचान होने तक इसे अस्पताल से नहीं ले जाया जा सकता।


परिवारों के बीच विवाद

मामला तब और जटिल हो गया जब दहित परिवार के सदस्य, जो बरदिया से पोखरा पहुंचे थे, ने अस्पताल में शव की पहचान गोपाल के रूप में की। गोपाल के बड़े भाई कृष्ण बहादुर थारू अस्पताल नहीं पहुंचे थे, इसलिए परिवार ने उनके आने का इंतजार किया। इसी बीच, राधे श्याम शर्मा बसयाल ने अस्पताल पहुंचकर शव संख्या 1003 की तस्वीर देखी और पुष्टि की कि यह उनके छोटे भाई दामोदर का शव है, जो बाढ़ के दौरान 67 पर्यटकों के साथ मानसरोवर से केरुंग की यात्रा पर थे।


बसयाल ने कहा कि शव के चेहरे पर कई विशेषताएँ उनके भाई से मेल खाती हैं, जैसे एक तिल और होंठों की मोटाई। उन्होंने कहा कि पहचान होने तक किसी भी परिवार को शव नहीं सौंपा जा सकता।


दूसरी ओर, गोपाल की बहन मंजी थारू का विश्वास है कि यह शव उनके भाई का ही है। उन्होंने कहा कि शव के दांत, माथा, होंठ, हाथ, सीना और चेहरा सभी उनके भाई से मेल खाते हैं।


यह मामला अनोखा नहीं है। कास्की जिला पुलिस के अनुसार, एक अन्य शव पर भी दो परिवारों ने दावा किया है। पुलिस ने अब तक पांच परिवारों के डीएनए नमूने लिए हैं ताकि शव की सही पहचान की जा सके।


पुलिस ने कहा कि आपदा के समय शवों की पहचान के लिए डीएनए जांच आवश्यक है, ताकि कोई शव गलत परिवार के पास न जाए। अब तक पोखरा से 16 शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिजनों को सौंपा जा चुका है।