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नेपाल में बाढ़ से प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं में बचाव अभियान तेज

नेपाल में बाढ़ के कारण जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे लोगों के बचाव कार्य में तेजी लाई गई है। नेपाली सेना और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद से सुरंगों में फंसे 537 कर्मचारियों तक पहुंचने का प्रयास जारी है। जानें इस कठिनाई भरे अभियान में क्या चुनौतियाँ सामने आ रही हैं और कितने लोग अब भी लापता हैं।
 

बचाव कार्य में तेजी लाने का प्रयास

नुवाकोट में बाढ़ से प्रभावित अपर त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे व्यक्तियों तक पहुंचने के लिए नेपाली सेना के इंजीनियरों ने रविवार को अपने प्रयासों को और तेज कर दिया। वे भारी उपकरणों और विस्फोटक का उपयोग करके सुरंग के प्रवेश द्वार को चौड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में नौ जलविद्युत परियोजनाओं के 537 कर्मचारी अब भी लापता हैं।


त्रिशूली-3ए परियोजना पर ध्यान केंद्रित

त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग भी इन परियोजनाओं में शामिल है। 'इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, नेपाल (आईपीपीएएन)' के अनुसार, इस परियोजना में संपर्क से बाहर बताए गए 42 व्यक्तियों तक पहुंचने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण का अनुमान है कि ये तकनीकी कर्मचारी भूमिगत बिजलीघर के रखरखाव कार्य में लगे हुए थे, जब वे सुरंग के अंदर फंस गए।


संयुक्त बचाव टीम की तैनाती

नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, घटनास्थल पर 90 सदस्यीय संयुक्त बचाव टीम तैनात की गई है। इसमें प्रशिक्षित कुत्तों के साथ विशेष खोज एवं बचाव दल, नेपाली सेना के 66 जवान, सशस्त्र पुलिस बल के 18 कर्मी और नेपाल पुलिस के छह जवान शामिल हैं। पीएमओ ने बताया कि टीम ने रविवार दोपहर लगभग दो बजे सुरंग के मुख्य हिस्से तक पहुंच बनाई और वहां एक दो गुणा तीन फुट का रास्ता बनाया।


बचाव कार्य में चुनौतियाँ

बचावकर्मी रस्सियों के सहारे उस रास्ते से नीचे उतरे और अंदर फंसे लोगों को आवाज दी, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। पीएमओ के अनुसार, बचाव अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए रास्ते को चौड़ा करने का कार्य जारी है। भारी उपकरणों की सहायता भी ली जा रही है।


अंतरराष्ट्रीय सहायता का आगमन

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि 11 सदस्यों की भारतीय तकनीकी टीम, जिसमें डॉक्टर और सुरंग विशेषज्ञ शामिल हैं, ने जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों का निरीक्षण किया। 'काठमांडू पोस्ट' के अनुसार, यह टीम शुक्रवार को काठमांडू पहुंची और नेपाली सेना तथा सशस्त्र पुलिस बल के समन्वय से चिलिमे और लांगटांग भेजी गई।


चीन से विशेषज्ञों की मदद

बचाव कार्य में सहायता के लिए चीन के सुरंग विशेषज्ञों की छह सदस्यीय टीम भी नेपाल पहुंच गई है। 'द हिमालयन टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी विशेषज्ञ हेलीकॉप्टर से त्रिशूली क्षेत्र पहुंचे और अपर त्रिशूली-3बी की सुरंग का आकलन करने के लिए नेपाली सेना की तकनीकी टीम के साथ समन्वय कर रहे हैं। बाढ़ के बाद सुरंगों और पहुंच मार्गों में मलबे और कीचड़ के कारण बचाव कार्य में कठिनाइयाँ आ रही हैं।