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नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से 32,000 लोग प्रभावित, पूर्व प्रधानमंत्री ने उठाई मुआवजे की मांग

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने 32,000 से अधिक लोगों को प्रभावित किया है, जिससे सड़कों और स्वास्थ्य सुविधाओं को भी नुकसान पहुँचा है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने लापता 5,000 लोगों की खोज की संभावना कम बताते हुए जलवायु परिवर्तन के लिए औद्योगिक देशों से मुआवजे की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जलवायु परिवर्तन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ऐसी घटनाएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं। राहत कार्यों के बीच प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति गंभीर बनी हुई है।
 

नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने 32,000 से अधिक लोगों को प्रभावित किया है। इस आपदा ने सड़कों, पुलों, स्कूलों और स्वास्थ्य सुविधाओं को भी गंभीर नुकसान पहुँचाया है। यह जानकारी शुक्रवार को सरकार द्वारा जारी प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आई।


राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस रिपोर्ट को साझा किया।


बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 1,295 हो गई, क्योंकि प्रभावित क्षेत्रों से और शव बरामद किए गए।


26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन से अचानक आई बाढ़ ने उत्तर और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में व्यापक तबाही मचाई।


पूर्व प्रधानमंत्री की चेतावनी

पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा कि बाढ़ के बाद लापता 5,000 लोगों के मिलने की संभावना कम है, जिससे मृतकों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन पर ध्यान न देने से ऐसी घटनाएं भविष्य में आम हो सकती हैं, जो तटीय देशों के लिए खतरा बन सकती हैं।


उन्होंने ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार औद्योगिक देशों से मुआवजे की मांग की।


ओली ने कहा, "बहुत कम लोग लापता हैं। जो लोग बह गए हैं, उन्हें खोजना मुश्किल है। बड़ी संख्या में लोग बह गए हैं और उनके शव चितवन, भारत और अन्य स्थानों पर मिल रहे हैं।"


उन्होंने यह भी कहा कि जो ग्लेशियर का हिस्सा टूटा, वह छोटा था, लेकिन बचा हुआ हिस्सा कभी भी टूट सकता है।


जलवायु परिवर्तन पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता

ओली ने चेतावनी दी कि यदि ग्लेशियर टूटते रहे, तो समुद्र का जलस्तर बढ़ेगा। उन्होंने कहा, "पहाड़ अन्य देशों पर भी असर डालेंगे। जलवायु पहाड़ों और समुद्रों से शुरू होती है।"


उन्होंने कहा कि नेपाल ने पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने में कोई योगदान नहीं दिया है, यह विकसित देशों का योगदान है।


उन्होंने नेपाल सरकार पर भी आरोप लगाया कि वह बाढ़ से प्रभावी ढंग से नहीं निपट रही है।


जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और तात्कालिक कदम

ओली ने इस आपदा के लिए वैश्विक तापमान को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि नेपाल का पर्यावरण नुकसान में कोई योगदान नहीं है।


अत्यधिक औद्योगिक देशों पर जिम्मेदारी: पर्यावरण को नुकसान बड़े विकसित देशों ने पहुँचाया है, इसलिए उन्हें इस तबाही का मुआवजा देना चाहिए।


समुद्री देशों पर खतरा: यदि ग्लेशियर लगातार पिघलते रहे, तो समुद्र का जलस्तर बढ़ने से निचले हिस्से में बसे द्वीप और तटीय देश पूरी तरह डूब जाएंगे।


त्वरित कार्रवाई की जरूरत: जलवायु संतुलन के लिए पहाड़ों और समुद्रों की सुरक्षा बेहद जरूरी है। इसके लिए वैश्विक स्तर पर तुरंत और गंभीर कदम उठाने होंगे।


आपदा प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति

फिलहाल, आपदा प्रभावित इलाकों में स्थिति बेहद दर्दनाक है और राहत कार्यों के बीच लोगों में एक बार फिर से हिमस्खलन होने का डर बना हुआ है।