नॉर्वे में मेटा के खिलाफ मीडिया संगठनों का कानूनी संघर्ष
मीडिया कंटेंट के उपयोग पर मेटा और मीडिया संस्थानों के बीच विवाद
ओस्लो: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल्स के लिए मीडिया सामग्री के उपयोग को लेकर सोशल मीडिया कंपनी मेटा और प्रमुख मीडिया संस्थानों के बीच कानूनी विवाद उत्पन्न हो गया है। नॉर्वे के प्रमुख मीडिया समूहों ने मेटा के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि मेटा की नई नीतियां उसे समाचार लेख, विशेष तस्वीरें, वीडियो और यहां तक कि पाठकों के लिए सशुल्क प्रीमियम सामग्री को बिना अनुमति के अपने AI उत्पादों के विकास में इस्तेमाल करने की अनुमति देंगी। इन मीडिया समूहों ने ओस्लो की अदालत से इन नई शर्तों के कार्यान्वयन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
विवादित शर्तें 20 नवंबर से लागू होंगी, 10 प्रमुख मीडिया समूहों ने किया विरोध
20 नवंबर से लागू होने वाली शर्तें
नॉर्वेजियन मीडिया के अनुसार, मेटा की नई नीति 20 नवंबर 2026 से प्रभावी होगी, जो फेसबुक और इंस्टाग्राम पर व्यवसायिक खातों का संचालन करने वाले सभी संस्थानों पर लागू होगी। इस नीति के खिलाफ नॉर्वे के सरकारी प्रसारक NRK, शिबस्टेड, अमेडिया, पोलारिस, और अन्य 10 प्रमुख मीडिया संगठनों ने ओस्लो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में याचिका दायर की है। इनका कहना है कि जब तक इन शर्तों की कानूनी वैधता स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक इन्हें लागू करने पर रोक लगाई जाए।
प्रीमियम कंटेंट पर मेटा की नीतियों का प्रभाव
प्रीमियम कंटेंट की सुरक्षा
मीडिया संगठनों की चिंता यह है कि मेटा की नई नीति में वह प्रीमियम सामग्री भी शामिल होगी, जिसके लिए पाठक सब्सक्रिप्शन शुल्क का भुगतान करते हैं। उनका तर्क है कि खोजी पत्रकारिता और गहन रिपोर्टिंग में कंपनियां भारी निवेश करती हैं। यदि मेटा बिना अनुमति और रॉयल्टी के इस सामग्री का उपयोग करता है, तो यह न केवल कॉपीराइट कानूनों का उल्लंघन होगा, बल्कि मीडिया उद्योग की वित्तीय स्थिरता को भी खतरे में डाल देगा।
मेटा ने तारीख बढ़ाई, लेकिन नियमों में बदलाव से किया इनकार
विरोध के बाद मेटा की प्रतिक्रिया
मीडिया संगठनों के विरोध के चलते मेटा ने इन शर्तों की लागू होने की तारीख 30 अक्टूबर से बढ़ाकर 20 नवंबर कर दी है। मेटा का कहना है कि इस समय का उपयोग पार्टनर्स को शर्तों के बारे में स्पष्टता देने के लिए किया जा रहा है। हालांकि, मीडिया संस्थान इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा के लिए कानूनी सहमति और उचित समझौते की आवश्यकता है।
वैश्विक स्तर पर AI और कॉपीराइट विवाद
कानूनी विवाद का वैश्विक संदर्भ
नॉर्वे में शुरू हुआ यह कानूनी विवाद वैश्विक बहस का हिस्सा है, जिसमें टेक कंपनियों द्वारा इंटरनेट से बिना अनुमति डेटा खींचने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रकाशकों का कहना है कि AI कंपनियां उनकी बौद्धिक संपदा का उपयोग करके प्रतिस्पर्धी उत्पाद तैयार कर रही हैं, जो अंततः मूल सामग्री निर्माताओं को हाशिए पर धकेल देते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ओस्लो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट का फैसला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और टेक कंपनियों के लिए मीडिया सामग्री के उपयोग के वैश्विक नियमों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।